Bifurcation of States

एक तांत्रिक को जब राजा से मुहमांगी अशर्फियाँ नहीं मिली तो राजधानी से लौटते लौटते उसने मुख्य कुँए में कोई पागल करने वाला रसायन मिला दिया | सब लोग जब उसका पानी पीने लगे तो अजीब अजीब हरकतें करते | शुरू शुरू में तो बलवा कुछ ही इलाकों में फैला मगर जब दंगा रोकने पहुंचे कोतवाल और समझाने पहुंचे मंत्री ने भी उसी इलाके का पानी पी लिया तो फिर तो क्या मंत्री क्या संतरी सभी बौराने लगे |

राजा के महल में मगर अलग कुआँ था, उसने पगलाने वाला पानी नहीं चखा था, तो वो रोज़ छत् से शांति सन्देश देता | सब लोग एक दिन भड़क उठे ये राजा साला सुबह सुबह पकाता है !! इसी को बदलो !! राजा घोड़े पे बैठ के भागने को हुआ की धन्नो रानी आई, वो ज्यादा समझदार थी, उसने युक्ति सुझाई, राजा जी चलो हम दोनों भी उसी कुँए का पानी पी आते हैं... बस पीते ही सारी समस्या नौ दो ग्यारह !! राजा भी पगला गया.. छत्त पे चढ़ के उल जलूल बकने लगा.. राजा को अपने जैसा देखा तो प्रजा भी मान गयी.. वही राजा बना रहा |

अपनी साइड भी ये ही सिचुएशन है.. पहले तो कहीं कोने खोपचे से कोई मिथलांचल, कोई बोडो लैंड कोई गोरखा लैंड की आवाज़ आ जाती थी, पता होता था कोई टुच्चा अपनी राजनीति चमका रहा है | फिर सचमुच ही एक दिन लालू की लाश पे बनने वाला झारखण्ड उनकी राज़ी ख़ुशी से बन गया, और फिर उत्तराँचल बन गया, कहीं उत्तराखंड बन गया, क्षेत्रीय पार्टियों की बजाए राष्ट्रिय पार्टियों की आवाजें आने लगीं !! विदर्भ !! तेलंगाना !! फलाना !! धीमकाना !!

अब तो मंगल यान मंगल के पास पहुँच गया, उतने ऊँचे से सब दिखता है.. पहले इस भंग वाले कूएँ को दूंढ़वा लो.. जल्दबाजी में कोई सीबीआई को न देना ये जांच | अब तो बॉर्डर के पार से राग़ बिलावल छेड़ रहा है कोई.. और टुकड़े मत करवा लो..

(24 September, 2014)