अरे भैया!! अचानक !! बताया नहीं ?
हाँ .. वो कुछ जल्दी में आना पड़ा..
क्या हुआ ? घर में सब ठीक है न ?
वो तुम अपना सामान pack कर लो.. बच्चों का सूटकेस भी तैयार कर लो .. जरा चलना पड़ेगा..
क्या हुआ..
वो.. (इतने पर समझ गयी होंगी वो भी..)
ऐसा ही कुछ संवाद रहता होगा या कुछ और कहा गया होगा ? जम्मू कश्मीर के
कुपवाड़ा में सोमवार को लांस नायक धनंजय वीरगति को प्राप्त हुए | जैसा की
बिहार के कई छोटे कस्बों में होता है... ठीक वैसे ही उनकी पत्नी भी बच्चों
की पढाई के लिए बच्चों साथ कंकडबाग (पटना) में किसी किराये के मकान में
रहती थीं | सोमवार रात तक उन्हें किसी ने बताया नहीं था | आज पार्थिव शरीर
भी आ जायेगा सुना है |
जब टीवी पर दिखाते हैं ऐसे किसी सैनिक का, तो
दो बॉक्स दिखते हैं.. एक में महिलाएं रोती हुई.. दुसरे में पुरुष गर्व से
सीना तानते हुए.. ये गर्व स्त्रियों को नहीं होता, या रोना पुरुषों को नहीं
आता?? खैर इस वाकये से कप्तान तुम भी याद आ ही गए.. वो 146 रुपये की उधारी
भी रहती है.. ऊपर इंडियन करेंसी चलती है की नहीं पता नहीं.. लेकिन हम
लौटना चाहते थे तुम्हारे पैसे.. उस वक़्त मेरे पास थे नहीं.. लौट के तुम आये
नहीं..
(26 August, 2014)