हमें याद आ रहा है रावण जिसकी पत्नी मंदोदरी उसे समझाती है गलत कर दिया सीता को लंका ला के.. ऐसा करो सीता को लौटा दो .. और दीखता है किसान जो बैंक से क़र्ज़ लिए बैठा है.. बीवी समझती है लौटा देना चाहिए.. रावण है !! बीवी की बात क्यूँ कर सुन ले? हेठी न हो जाएगी?

हमें फिर याद आता है रावण जो अपने भाई कुम्भकर्ण से उलझा हुआ है.. कुम्भकर्ण समझाता है भाई ऐसे तो मारे जायेंगे सब.. रावण बड़ा था डपट देता है.. संस्कारों के नाम पर.. फिर हमें दीखता है किसान जिसका छोटा भाई आलू नहीं चिप्स बना कर बेचने को कहता है किसान यहाँ भी डपट देता है.. मौगा कहीं का खेत में जाना नहीं है तो आलू छिलेगा बैठ के.. 10 रु किलो आलू ले जा के 200 रु किलो आलू चिप्स बेचता कोई व्यापारी भी दिखता है.. हम निगाहें फेर लेते हैं..

हमें फिर याद आता है रावण .. बेटे मेघनाद से भिड़ा हुआ इस बार.. बेटा युद्ध रोकने को कहता है.. रावण दम नहीं का ताना देता है !! और फिर दिखा किसान.. जिसका बेटा जैविक खाद की बात करता है और किसान कहता है "दो अक्षर पढ़ के हमें न सिखाओ... बाल सफ़ेद धूप में नहीं हुए हमारे... " बेटा चुप रह जाता है, और अगली पीढ़ी खेती नहीं करती.. घाघ की कविता "उत्तम खेती, माध्यम बान, नीच चाकरी.. भीख निदान.." कान में गूंजता होता है और वो नीच चाकरी कबूलता है किसी multi national की..

हमें याद आ रहा है रावण.. जब भाई विभीषण उसे समझा रहा है "भैया राम से न बैर करो" और रावण लात मारता है विभीषण को और वही विभीषण राम से जा मिलता है.. इसी मौके पर किसान दिखा अपना.. ये लात मारता है कृषि वैज्ञानिकों को और वही कृषि वैज्ञानिक फिर जा मिलता है .. बीज बनाने वाली कंपनी थी कोई .. अब हर छोटी मोटी कंपनी का नाम याद नहीं रखते हम.. पता नहीं क्या मक्का उगते हैं शायद, कपास भी क्या?? कौन पूछता है?? .. हुंह...

 रामयण पे अगरबत्ती दिखाने से फ़ुर्सत हो गई है साहेब?? तो दो चार पन्ने पलटा के कभी पढ़ भी लेते.. एक नज़र इधर भी...

(20 August, 2014)