लेखन और उसमे सुधार

अपने लेखन को सुधारने में थोड़ा समय लग सकता है लेकिन ये उतना कठिन काम नहीं है | कुछ अच्छी आदतें अगर आप अपनाएं तो आप पाएंगे की आपके लेखन में लगातार सुधार हो रहा है |

1. पेशेवर बनना है? तो फिर एक पेशेवर की तरह बर्ताव भी कीजिये | चाहे किसी संपादक को अपनी चिट्ठी भेज रहे हों या फिर किसी ब्लॉग, किसी पोस्ट पर कमेंट कर रहे हों, हमेशा अपने लिखे को दोबारा पड़ें | जरूरत पड़े तो edit के बटन का इस्तेमाल करें |

2. निरंतर अभ्यास : कहने की तो जरूरत है नहीं की बिना अभ्यास के आपका लेखन सुधार नहीं सकता | अपने दिन भर के समय से 15 या 20 मिनट हर रोज़ निकालें और लिखें | एक दिन में 2 – 3 घंटे लिखने से कहीं ज्यादा फायदा होगा अगर रोज़ 15 मिनट लिखें |

3. संसाधनों का उपयोग कीजिये: अंग्रेजी में लिखते हैं तो कई Word Processor हैं आपके काम में मदद के लिए MS Word तो लगभग हर कंप्यूटर में होता ही है | अगर हिंदी में लिखते हैं तो Google Transliterate जैसे संसाधन आपके लिखे को देवनागरी में बदल देने के लिए हैं ही | इन्हें download कीजिये और चलाना सीखिए |

4. पढ़िए !! कई बार जब हम कहते हैं की पढ़िए तो लोगो को आश्चर्य होता है ! क्यों पढ़ें ? हमें तो लिखना है.. भाई बिना ढेर सारा पढ़े आप एक दो पैराग्राफ भी नहीं लिख पाएंगे | लिख भी लेंगे तो अच्छा नहीं लिख पाएंगे | सारे अच्छे लेखक काफी ज्यादा पढ़ते हैं, ज्यादा नहीं तो थोड़ा बहुत ही सही, अख़बार, पत्रिकाएं, उपन्यास जिसमें आपकी रूचि हो जरूर पढ़िए |

5. कुछ किताबें ले आईये: अगर सचमुच लिखना चाहते हैं तो व्याकरण, शब्द संरचना और लेखन की कुछ किताबें निकालिए | घर में ही किसी कोने में पड़ी होंगी | Martin की Grammar या फिर Word Power made Easy जैसी किताबों से थोड़ी धूल झाड़ लीजिये |

6. अन्य लेखकों के काम पे नज़र रखिये: पेशेवर लोगों की अपने कार्य के क्षेत्र में जान पहचान होती है | फेसबुक चलाईये तो दो चार पत्रकार, दो चार ब्लॉग लिखने वालों, दो चार उपन्यासकारों को Follow करना शुरू कीजिये | उनके लिखे पे टिप्पणी दीजिये, अपने विचार रखिये जान पहचान बनाइये | मानिये या न मानिये ये बहुत काम आता है लेखन को सुधारने में |

7. अपने औज़ार और संसाधन ढंग से रखना सीखिए: कभी डेंटिस्ट की टेबल देखी है? बिलकुल क़रीने से रखी हुई? या बढई को देखा है? जो औज़ार जहाँ से उठाता है वहीँ वापिस रखता है | आँख बंद करके भी हाथ डालेगा तो सही औज़ार ही उठाएगा !! फोटो के साथ पोस्ट डालते हैं? एक अलग फोल्डर में सारी तस्वीरों को सही नाम से save कीजिये | अपने लिखे सारे पोस्ट एक जगह सहेजना सीखिए | चाहे दैनिक diary जैसा कुछ बनाईये और तारिख के हिसाब से सारे पोस्ट रखिये या फिर जिस विषय पर लिखा था उस विषय के नाम से फाइल save कीजिये | अगर एक महीने तक हर रोज़ लिखते रहे तो 1 तारिख की पोस्ट आप 25 तारिख को अपने कंप्यूटर में नहीं ढूंढ पाएंगे अगर संभाल के नहीं रखा है तो |

8. प्रेरणा: कई दिन आप अपने आप ही 10 पोस्ट लिख लेंगे और किसी किसी दिन झक मारने के वाबजूद एक लाइन भी नहीं लिख पाएंगे | ऐसे दिनों के लिए अपनी पोस्ट बचा के रखना सीखिए | सारी सैलरी एक ही दिन में तो नहीं खर्च करते न? और आपकी प्रेरणा का श्रोत भी ढूंढ के रखिये, किसी ब्लॉग से पढ़ कर मुद्दों पे अपनी राय देते हैं आप? अखबार के किसी लेख से प्रेरणा लेते हैं? किसी और लेखक के जवाब में लिखते हैं? पता कीजिये कैसे लिखते हैं..

9. एक कोना अपना सा: हम तो घर में एक कोने में सोफे पे बैठे टाइप करते हैं पोस्ट | बायीं तरफ़ हाथ बढाओ तो मेरी किताबें होंगी, यहाँ से टीवी भी दीखता है और खाना खाने का टाइम होने पे डाइनिंग टेबल भी सामने ही दीखता है (“खाने के टाइम में तो उठ जाओ !! जब देखो फेसबुक, ब्लॉग, कंप्यूटर!!” जैसी डांट खाने की नौबत कम ही आती है) आप भी अपना कोना ढूँढिये, घर का कोई अपना सा कोना जहाँ आराम से बैठ कर लिखा जा सके |

10. छोटी मोटी चीज़ों पे ध्यान मत दीजिये: लिखोगे तो गलतियाँ भी होंगी ही भाई ! परेशान होने की जरूरत नहीं | पहले लिख लीजिये फिर गलतियाँ भी सुधार लीजियेगा | बीच में रुक कर गलतियाँ सुधारने बैठे तो flow जाने की संभावना होती है | पहले लिखिए फिर सुधारिए |

11. Editing भूलिए मत: कूड़ा कबाड़ा तो परोसते नहीं न किसी के सामने? कड़ाही में बना खाना, आप ढंग से, किसी और बर्तन में सजा कर लाते हैं न मेहमानों के सामने? ऊपर से धनिया छिड़क कर? तो वैसे ही लिख लेने के बाद सुधारना मत भूलिए, एक दो वर्तनी (spelling) की गलती, कहीं कोई मात्रा, कोई फुल स्टॉप, कोई कोम्मा छूटा ही होगा | एक बार दोबारा पढ़ के सुधारिए जरूर |

12. विषय पर ध्यान दीजिये: अधकचरा ज्ञान मत परोसिये | लोगों को सब पता चलता है | और सबसे बड़ी बात की फेसबुक, twitter जैसे माध्यमों में आपके बराबर या आपसे ज्यादा जानने वाले कई लोग हैं, मोहल्ले में चाहे आप शेर हों, यहाँ पोस्ट दागने से पहले विषय दोबारा देखिये |

13. व्याकरण पर ध्यान दें: प्रथम पुरुष (First Person) से अचानक उत्तम पुरुष ( Third Person ) में मत कूद जाईये | पैराग्राफ छोटे रखिये, हो सके तो वाक्य भी | बहु वचन को एक वचन मत बनाइये, इन्टरनेट पर भी creative writing पे काफी कुछ है | पढ़ लीजिये थोड़ा |

14. शब्दों के जाल में मत पड़िए: बड़े बड़े शब्दों के मायाजाल में आपका सन्देश तो नहीं खो रहा है | भाषा को इतना क्लिष्ट मत बनाईये की लोग पढ़ ही न पायें | आम बोल चाल वाली भाषा ही रखिये अगर हो सके तो |

15. अपने तथ्य जांच लें: अभी सेकुलरिज्म पर बोलते हुए किसी कांग्रेसी ने कागज़ में 100-110 जैसा कुछ लिखा और बोल दिया 600 और बस योगी जी ने धज्जियाँ उड़ा दी सेकुलरिज्म की | अपनी रचनात्मकता दिखाने के लिए लेखन में काफ़ी जगह होती है लेकिन कोई ऐसे गलत तथ्य मत परोस दीजिये की लोगों को किले में सेंध मारने का मौका मिल जाये | कई पुराने पापी आपके लेखन से जल जल के मरे जा रहे हैं यहीं, कदम जरा संभाल के !!

16. विषय से मत भटकिये: एक ही विषय पर रहिये एक पोस्ट, एक लेख में | दो चार मुद्दे उठा देंगे तो लोगों का ध्यान भटक जायेगा |

17. थोड़ी छुट्टी ले लिया कीजिये: चाहे आप 1000 शब्द का एक ब्लॉग पोस्ट लिख रहे हैं या 100,000 का उपन्यास, छोड़ी फ़ुर्सत ले लिया कीजिये | तरोताजा लौटेंगे तो एक अलग नज़रिए से अपने लिखे को देख पाएंगे | बेहतर लिख पाएंगे आप |

18. ज्यादा जानकार लोगों की मदद लें: पहले मैंने दूसरों की पोस्ट कॉपी की है, उनमे तोड़ मरोड़ की है, किसी और के लिखे को अपने तरीके से पेश किया है | सीखने का ये एक अच्छा तरीका है | लिखने वाले को एक मैसेज कीजिये और फिर उसकी पोस्ट का इस्तेमाल कीजिये, क्रेडिट मुख्य लेखक को ही दीजिये | इसमें किसी के अहंकार को ठेस लगने की गुन्जायिश हमेशा होती है लेकिन थोड़े ही दिन में आप दो चार ढंग के सिखाने वाले लोगों को ढूंढ लेंगे | प्रोफाइल से थोड़ा कचड़ा भी साफ़ हो जायेगा इसी बहाने | ये पोस्ट भी मैंने कई और जगहों से पढ़ के ही लिखी है.. पूरी अपनी नहीं है मेरी..

19. शब्दों का अपना ज्ञान बढ़ाएं: कागज़ और कलम अपनी हमें बड़ी प्यारी है | लेकिन लिखने का असली हथियार होता है आपके शब्द | कभी ठेठ भाषा में लट्ठ मारने की जरूरत भी होगी कभी sophisticated या polished बनने की भी, इसलिए शब्दों का अपना ज्ञान बढाईये |

20. अपने को जाने: Original तभी होगा जब आपका होगा, आप अपने जैसे ही रहिये | किसी और को कॉपी करने की कोशिश का कुछ ख़ास फायदा नहीं होता | जिस मुद्दे के लिए आप अपने साथ इमानदार हो सकते हैं उन्ही पे लिखिए | हर बात पे कलम चलाने की कोई जबरदस्ती थोड़ी न है ! न हम नेता हैं न अभिनेता.. हर मुद्दे पे लिखा तो उतनी बार पलटी भी मारनी पड़ेगी.. फिर कोई न कोई याद दिला देगा “बेटा.. तुमसे न हो पायेगा !!”

लम्बी सी एक लिस्ट हमने तो बना दी है.. आपके पास भी अगर इसमें जोड़ने के लिए कुछ है तो आपका स्वागत है.. आईये लिखिए..