India Goes to Mars

ब्रम्हांड पुराण में भगवान हयग्रीव और अगस्त्य मुनि की बातचीत का एक सन्दर्भ है जहाँ ललिता सहस्त्रनाम आता है |

पहला नाम श्री माता है क्योंकि वो जगत की माता मानी जाती हैं | अब हज़ार नाम में तो कई सुन्दर नाम आते हैं, फिर ये भी ध्यान देने लायक है की आगे पीछे वाले दोनों नामों को जोड़े में पढ़े तभी तात्पर्य समझ में आता है |

ऐसे में मेरा ध्यान दो नामों पर गया | एक है “अंतर्मुखा समाराध्या” और अगला नाम है “बहिर्मुखशु दुर्लभा” | पहले का मतलब है “जो अंतर्मन में, एकांत में अपने अन्दर पूजी जातीं हैं” और अगला ही नाम बताता है की उनकी पूजा का सार्वजनिक प्रदर्शन उन्हें आपके लिए अनुपलब्ध कर देता है |
सादगी में भी श्रृंगार है तो पूजा में दिखावा जरा कम रखें |

लेकिन भारतवासी show off न करे तो कैसे चलेगा ? उसके लिए ऐसा करते हैं हम बुध को मंगल पे चलेंगे !!

इसका hidden benefit भी है वहां का साल 600+ दिन का होता है तो वो जो अभी कुछ साल से 25 पे अटकी हैं वो अचानक से 16 की हो जाएँगी !! क्रन्तिकारी आईडिया है भाई !! बहुत क्रन्तिकारी !!

फिर दुनियाँ भी हमें देखेगी हम भी दुनियाँ को देखेंगे...

(24 September, 2014)