पढ़ी लिखी लड़कियों से क्यों नहीं उलझना चाहिए ? क्योंकि भारी नुकसान होने
की संभावना रहती है | अब जैसे एक बार एक लड़की नदी किनारे बैठी किताब पढ़
रही थी और फारेस्ट गार्ड वहां से गुजरा, लड़की के पास मछली पकड़ने की बंशी भी
थी तो फारेस्ट गार्ड ने कहा की आप पर प्रतिबंधित इलाके में मछली मारने का
जुरमाना करना पड़ेगा.. लड़की ने कहा क्यों मैं तो मछली पकड़ नहीं रही.. मगर
अफ़सर तो सरकारी था अड़ गया.. कहने लगा नहीं पकड़ रही तो क्या?? औज़ार तो
तुम्हारे पास सारे हैं...
महिला ने कुछ देर सोचा फिर कहा ठीक
है
करो फिर मैं भी तुमपे सेक्सुअल हरास्स्मेंट का मुक़दमा ठोंकती हूँ.. अफ़सर
घबडाया !! पूछने लगा ये मैंने कब किया?? महिला ने कहा किया नहीं तो क्या?
औज़ार तो सारे ले के तुम आये थे !!!
अभी एक चुटकुला पढ़ा जिसका मुद्दा ये था !!
और ये दुर्घटना तो बिहार में भी
हो सकती है !! मान लीजिये हम महिला कॉलेज के सामने से निकले और किसी युवती
ने ये इलज़ाम ठोक दिया हमारे सर तो ?? किया हो या न किया हो पीटेंगे तो हम
ही.. कोई सुनवाई नहीं होने वाली.. अच्छा हो कभी ऐसी सिचुएशन आये तो मुह पे
रुमाल रख के निकल लें ( भगवान् ये दिन न दिखाए, हर रोज़ रुमाल भी नहीं होता
हमारी जेब में.. रोज़ ही घर भूल जाते हैं )
अब टाइम्स ऑफ़ इंडिया
वालों के साथ हो गया है ये.. पहले तो उल जलूल कमेंट करते धरे गए | अब बहाने
बना रहे हो, हेक्टिक schedule और सुपर charged माहौल में गलती हो जाती है
जैसे, वैसे ही ये भी हो गई?? तुम्हारी गिरी हुई सोच उठा कर सभी लोग तो
वापिस कर ही रहे हैं, जेब में डालो और मुंह ढक के निकल लो भाई..
बाकि नेता
जी तो कहते ही हैं लड़कों से ग़लती हो जाती है...
(22 September, 2014)