And Declare War



बसंत का मौसम था और 401 BC का साल, जब एथेंस के ठीक बाहर रहने वाले, जेनोफोन को एक मित्र का निमंत्रण मिला | सायरस जो की पर्सिया के राजा का भाई था, वो कुछ ग्रीक सिपाहियों को ले कर एक लड़ाई शुरू करना चाहता था | इस अनुरोध में अजीब बात ये थी की ग्रीक और पर्शियन एक दुसरे के कट्टर शत्रु थे, कुछ 8 साल पहले पर्शिया ने ग्रीस पर हमला भी किया था | ग्रीक सिपाही जाने माने योद्धा थे और उन्होंने पैसे के बदले युद्धों में भाग लेना शुरू कर दिया था | पर्शिया के अन्दर मौजूद विद्रोही शहरों को दण्डित करने के इरादे से सायरस ग्रीक सिपाहियों को भर्ती करना चाहता था |

सायरस की विशाल फौज़ में अगर ग्रीक लड़ाके भी होते तो सोने पे सुहागा होता | जेनोफ़ोन कोई योद्धा नहीं था, अपना जीवन उसने कुत्तों और घोड़ों को पालने में बिताया था | अक्सर वो एथेंस में अपने मित्र सुकरात से वैचारिक विमर्श करने जाता रहता था | पैत्रिक संपत्ति भी उसके पास इतनी थी की उसे योद्धा बनने की जरूरत नहीं थी | लेकिन उसने सोचा की युद्ध को पास से देखने का, सफ़र से दुनिया को देखने और समझने का ये अच्छा मौका है | लौटने पे एक किताब लिखने का भी मन बनाया उसने और अन्य दस हज़ार के लगभग सिपाहियों के साथ वो भी सायरस की फौज़ में शामिल हो गया |
 
इस दल में ग्रीस के सभी हिस्सों से लोग थे और कुछ महीने तो पर्शिया के सफ़र में अच्छे बीते | थोड़े दिन बाद जब वो काफ़ी अन्दर तक आ गए तो सायरस ने भेद खोला, वो अपने भाई के खिलाफ़ बेबीलोन पर हमला करने जा रहा था | ग्रीक योद्धाओं ने इस बात पे ऐतराज़ जताया तो सायरस ने पैसे बढ़ा दिए और सबका मुंह बंद हो गया | सायरस और अताक्सएर्क्सेस की फौजों की भिडंत कनाक्सा के मैदानों में हुई | लड़ाई के शुरू होने के कुछ ही समय में सायरस मारा गया और युद्ध ख़त्म हो गया | अब तो ग्रीक सिपाहियों की हालत बिगड़ गई !! घर से करीब पंद्रह सौ किलोमीटर दूर और दुश्मन के घेरे में ! लेकिन राजा जरा दिलदार था उसने कहा की ग्रीक लोगों से उसकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी तो है नहीं इसलिए वो जा सकते हैं | अपने एक सिपहसलार को ग्रीस तक का रास्ता दिखाने के लिए उनके साथ भी कर दिया |
 
वापसी का सफ़र शुरू हुआ, थोड़ा समय बीतते ही नयी समस्याओं ने सर उठाया | जो खाने पीने का सामान अताक्सएर्क्सेस ने दिया था वो रस्ते के लिए काफ़ी नहीं था | उसके सिपहसलार तिस्साफेर्नेस ने जो रास्ता वापसी के लिए चुना था वो भी कठिनाइयों से भरा हुआ था | ग्रीक दल के नेता क्लेअर्चुस ने अपनी समस्याएं तिस्साफेर्नेस को बताने के लिए एक बैठक बुलाई | तिस्साफेर्नेस ने ज्यादा पर्शियनों को इकठ्ठा किया और घेर कर मिलने आये सब ग्रीक सिपहसालारों को पकड़ लिया | उसी शाम उनका सर कलम कर दिया गया | एक ग्रीक सिपाही जैसे तैसे जान बचा कर वापिस लौटा और सारी घटना बताई | कुछ ने लड़ने की योजना बनाई, लेकिन नेतृत्व तो रहा नहीं था, ऐसे में हार तय थी | जेनोफोन इस समय तक पूरी यात्रा में कटा छंटा सा रहा था | रात में उसने एक सपना देखा, सपने में देवता ज़ीउस ने एक बिजली उठाई और उसके पैत्रिक घर पर पटक दी ! उसका घर जल के ख़ाक हो गया ! घबड़ाकर जेनोफोन जाग गया | अचानक उसकी समझ में आया मौत ग्रीक सिपाहियों के सर पर नाच रही थी और फिर भी वो हताशा निराशा में पड़े कराहने और क़िस्मत को कोसने में अपना समय बर्बाद कर रहे थे | समस्या कहीं बाहर नहीं ग्रीक सिपाहियों के अन्दर ही थी ! मित्र और शत्रु में भेद न कर पाने के कारण उनकी ये दशा हुई थी | रास्ते के पहाड़, नदियाँ और दुश्मन काबिले नहीं एकाग्रता से अपने लक्ष्य का निर्धारण न कर पाना उनकी मुख्य समस्या थी | जेनोफोन ऐसी जगह, दुश्मनों द्वारा सर कलम करवाकर नहीं मरना चाहता था | उसी समय उसने तय किया, युद्ध चाहे उसे न आता हो लेकिन सुकरात के साथ इंसानी फ़ितरत को सीखने समझने की उसकी जानकारी बहुत ज्यादा थी | उसे पता था की अगर ग्रीक अपने शत्रुओं पर ध्यान देंगे तो इस समस्या से निपटने में ज्यादा मुश्किल नहीं आएगी |
 
जेनोफोन ने तय किया की वो ज़ीउस का वज्र बन जायेगा, अपने साथियों को जगायेगा और उन्हें रास्ता दिखायेगा | फ़ौरन उसने सभी जिन्दा बचे टुकड़ियों के प्रमुखों को इकठ्ठा किया और अपनी बात उन्हें समझाई | उसने कहा की पर्शियन फौज़ के खिलाफ युद्ध का बिगुल फूंका जाये, एक दुसरे से बहस और दोषारोपण में हम समय नष्ट नहीं करेंगे, हमारी सारी उर्जा पर्शियन फौज़ के खिलाफ़ इस्तेमाल होगी | उसने मैराथन की लड़ाई में पर्शिया की विशाल फौज़ पर विजय की याद दिलाई और मैराथन की दौड़ की भी ! तय किया की वो अपनी मल धोने वाली गाड़ियों को जला देंगे, आस पास मिलने वाले फ़लों, और शिकार से गुजारा चलाएंगे और तेज़ से तेज़ चलकर ग्रीस पहुचेंगे | कभी भी सिपाही अपने हथियार नहीं रखेंगे और चौबीस घंटे दुश्मनों के प्रति सतर्क रहेंगे | आमने सामने से बचने की बातें करने वाले को कायर घोषित कर के भगा दिया जायेगा | जेनोफोन ने कहा की पर्शियन हमें कठोर बना देंगे, हम सिर्फ़ घर पहुँचने की बात याद रखेंगे |
 
वहां मौजूद सिपहसलार समझ रहे थे की जेनोफोन सही कह रहा है | जब पर्सियन संदेशवाहक उनके पास बातचीत का सन्देश लाया तो उसे भगा दिया गया | जेनोफोन के नेतृत्व में ग्रीक आगे बढ़े, उन्होंने आस पास मौज़ूद चीज़ों पर गुजारा करना सीखा, सम्मुख युद्ध से बचना सीखा, रातों को मार्च करना सीखा | पर्शियन उन्हें पकड़ पायें इस से पहले वो आगे निकल जाना सीख गए | वापसी में कुछ साल लगे थे, लेकिन ज्यादातर सिपाही, जिन्दा घर लौट आये |
 
ये कहानी CARL SCHMITT, 1888-1985 ने कई साल पहले लिखी थी, इस से बहुत ज्यादा विस्तृत रूप में, ये सिर्फ़ उसका एक छोटा सा सार-संक्षेप है | मुद्दा इस कहानी की सीख पे ध्यान दिलाने का था | राजनीति में वो अवसर होते हैं जब आप अपने मित्रों और शत्रुओं में भेद कर पाते हैं | सबसे ज्यादा इक्छाशक्ति तब लगती है जब आप अपने शत्रु को अपना शत्रु घोषित करते है |
 
जीवन के अन्य अवसरों पर भी आपको अपने एक शत्रु को पहचानना और अलग करना होता है | ये सबसे मुश्किल घड़ी होगी, और ये करना आवश्यक भी होगा | आपका ख़ुद का आलस्य, प्रमाद वो शत्रु हो सकता है, समय नष्ट करने के दुसरे तरीके चुन रखें हो आपने ये भी हो सकता है, एक से ज्यादा लक्ष्य पर एक साथ प्रयास करने के कारण हो सकता है आप पूरी लगन से एक काम में सफ़ल न हो पा रहे हों | अपने उस एक शत्रु को पहचानिए, और अब युद्ध की घोषणा कीजिये !!