चाँद की बिंदी तो लगा ली सरकार, और काजल में हमेशा खूबसूरत लगती हो |
तुम्हारे साथ खरीदारी करना पसंद है | शर्ट की जेब में आपने पैसे रखे थे, ये
कई महीनों से, कई बार, करते देखा है | बताते नहीं कभी, की हमें पता है, की
तुमने रक्खे हैं, ये अलग बात है | फिर अपने पसंद की चीज़ों पे जम के
bargaining करने के बाद पलट के कहना की " पैसे दो " !! अपने ही पैसे खुद ही
वापिस चाहिए ? पति चुनने में हुई गलती की कसर खरीदारी कर कर के नहीं
निकालनी ?
अच्छा ये सवा दो और दो पंद्रह क्या होता है ? चूड़ी का di
ameter
? दुकान से पहन के क्यों नहीं आ सकती ? हमसे मेहनत करवाना जरूरी है ? अब
पायल भी !! ये छन्न छन्न की आवाज़ से तो कंसंट्रेशन की धज्जियाँ उड़ जाती
हैं.. पूरे घर में पायल छनकाते फिरना क्यों जरूरी है ? अच्छा अच्छा नहीं कर
रहे हर चीज़ में सवाल..
लो
जी सरकार तैयार भी हो गए, अब छत पर ? दिया अच्छा है और हल्की सी रौशनी में
तुम भी अच्छी लग रही हो.. चलें अब वापिस घर | भूखे में भजन कैसा होता है ये
पता नहीं लेकिन ये भूखे रोमांस नहीं हो पायेगा हमसे |
(13 October, 2014)