ट्रेन में सफ़र कर रहे हों तो सबसे आसानी से आपको पंचतंत्र, हितोपदेश, और फिर विक्रमादित्य की कहानियों की किताबें मिल जाती है | सस्ती भी होती हैं, और आप अपनी सीट पर किसी और के लिए छोड़ कर अपने सफ़र पे आगे निकल जाएँ तो अफ़सोस भी नहीं होता |
इन्ही किताबों में एक कहानी है किसी सुन्दर सी युवती की | ये युवती व्यवहार कुशल थी, सुन्दर थी रूप रंग और यौवन से, पाक़ कला में कुशल थी और भी न जाने कितने गुण थे इसमें | जाहिर सी बात है की कोई भी इसके आस पास से गुजरता तो मन्त्र मुग्ध हो जाया करता था | कुछ कुछ Mills & Boons वाली हीरोइन जैसी ! पता नहीं क्यों ऐसी सुंदरियाँ सिर्फ किताबों, कहानियों में ही होती हैं |
खैर !! अपने गुरुकुल को जाते हुए तीन विद्यार्थी भी इसपे रीझ गए | शाम का समय था और आगे का रास्ता भी वन से होकर जाता था तो तीनो छात्र उसी गाँव में रुके | किस्मत से उसी लड़की के पिता इनके मेजबान भी हुए | रात तीनो ने उसी लड़की का जिक्र करते काटी | अलग अलग कहानियों में कारण अलग अलग हैं, लेकिन सुविधा के लिए मान लेते हैं की रात उस लड़की को किसी सांप ने काट खाया | बस लड़की चल बसी | उसकी मृत्यु से तीनो आहत हुए | एक ने तो उसके शवदाह के उपरान्त राख की पोटली बनाई और ले कर जंगलों में निकल गया | दूसरा उसी शमशान में बैठा रहा | तीसरा विलाप करता कहीं चला गया |
कुछ ही वर्षों में राख ले कर निकले युवक की मुलाकात एक साधू से हुई जो राख से भी पूरा शरीर जोड़ देता था | युवक ने बड़ी मेहनत से वो विद्या साधू से सीख ली | इधर शमशान में बैठे युवक की मुलाकात भी एक औघड़ से हुई और उसने भी पूरे शरीर की संरचना और रक्त प्रवाह आदि की विद्या लड़के को सिखा दी | तीसरा युवक भी इधर उधर भटकता एक तांत्रिक के पास पहुंचा और उसने तांत्रिक से मृत शरीरों में प्राण फूंकने की विद्द्या सीख ली |
कुछ ही समय में तीनो युवक एक जगह उसी शमशान में इकठ्ठा हुए | एक ने राख से शरीर बनाया, दुसरे ने उसमे रक्त प्रवाह, तंत्रिका इत्यादि डाल के उसे पूरा कर दिया | तीसरे ने इस मृत शरीर में फिर से प्राण फूंक दिए | अब तीनो में झगड़ा होने लगा, तीनो ही उस स्त्री से विवाह के इक्छुक थे और कोई भी अपना दावा छोड़ने को तैयार न था | पंचायत भी अपने को असमर्थ पा रही थी फैसला देने में |
ये पूरी कहानी सुना कर बेताल ने पुछा बताओ राजा विक्रम उचित वर कौन था तीनों में से ?? अब विक्रमादित्य तो समझदार थे, तो उन्होंने कारण गिनाये | जो राख ले गया था वो तो नदी में राख बहाने वाले पुत्र जैसा हुआ और जिसने प्राण फूंके वो जीवन देने वाले पिता जैसा !! इसलिए जो शमशान में ही इंतज़ार करता रहा वो ही पति बनने योग्य है | इतना सुनते ही बेताल भाग गया | राजा के न बोलने की भी शर्त थी !!
अब समस्या ये है की कई लोग मोदी विरोध के नाम पर सत्ता सुंदरी का हाथ थामने इकठ्ठा तो हो गए हैं | एक हैं लालू जो अगले ग्यारह साल तक किसी पद पर हो ही नहीं सकते, दुसरे मुल्लायम हैं उन्होंने ने तो पहले ही सत्ता अपने सुपुत्र को थमा दी है | तस्वीर में एक कोई दाढ़ी वाले भी हैं, पुराने ज़माने में बड़े प्रचलित नेता थे, आज कल बताना पड़ता है की वो कौन हैं | एक आखरी हैं नए वाले PM in waiting यानि आपने सुशाषण बाबु !!
अब मगर हम कोई विक्रमादित्य तो हैं नहीं, ऐसे में सत्ता सुंदरी का हाथ इनमे से किसके हाथ में दें ??
(05 December, 2014)