युद्ध का छठा दिन था, और अभिमन्यु अब तक के सबसे महान शूरवीरों में गिना जाने लगा था | द्रोण जैसे शूरवीर भी इस लड़के से परेशान थे | हर दिन अनगिनत सैनिकों को समाप्त कर डालता था | तेरहवें दिन जब द्रोण ने युधिष्ठिर को बंदी बनाने की योजना बनाई तो उन्होंने चक्रव्यूह रचा | अर्जुन, कृष्ण और प्रद्युम्न के अलावा महाभारत काल का कोई योद्धा इस व्यूह को भंग नहीं कर सकता था |
अर्जुन किसी और से युद्ध के दुसरे छोर पर मोर्चा ले रहे थे, ऐसे में युधिष्ठिर ने अभिमन्यु को चक्रव्यूह तोड़ने को कहा | भीम चिंतित थे, प्रिय भतीजा और सिर्फ़ अन्दर जाना जानता है, तोड़ के बाहर आना नहीं जानता | लेकिन लड़कों को कौन समझा पाया है ? चक्रव्यूह के पहले ही द्वार पर बालक जयद्रथ से जा टकराया | जब तक जयद्रथ समझता की वो टकराया किस से है, ज़मीन पे रथ विहीन पड़ा था !
शल्य पांडवो के मामा थे, अभिमन्यु के नाना | उन्होंने अभिमन्यु को रोकने का प्रयास किया | थोड़ी ही देर में शल्य मुर्छित और उनका भाई मृत पड़ा था | अभिमन्यु हारता ही नहीं | क्रिपाचार्य और द्रोण, दुस्साशन के साथ आगे आये, साथ देने के लिए कर्ण भी आया | कर्ण के धनुष को अभिमन्यु ने काट दिया | द्रोण और क्रिपाचार्य घायल हुए | दुस्साशन ज़मीन पे जा पड़ा और कर्ण का छोटा भाई भी मारा गया | कौसल के राजा इक्ष्वाकु वंश के ब्रिहद्बल भी अभिमन्यु से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए |
कौरव सेना का एक बड़ा सा हिस्सा अभिमन्यु से लड़ता हुआ समाप्त हो रहा था | दुर्योधन का पुत्र लक्ष्मण दुर्योधन की मदद के लिए आया | दुर्योधन तो घायल हो कर ज़मीन पे जा गिरा, लक्ष्मण अभिमन्यु से लड़ता हुआ मारा गया | होश में आते ही दुर्योधन ने सारे महारथियों को ललकारा |
अभिमन्यु से एक दो का जीतना असंभव था | सभी सात शूरवीर एक साथ हमला करें, दुर्योधन उकसाता हुआ बोला | द्रोण ने कहा की अभिमन्यु अनुचित तरीकों से ही जीता जा सकता है | आज्ञा पाते ही कर्ण ने अभिमन्यु का धनुष काट दिया, उसी समय द्रोण और क्रिपाचार्य ने उसके रथ के घोड़ों और सारथि को मार गिराया | अभिमन्यु ने तलवार ढाल उठा ली | द्रोण ने तलवार और ढाल भी काट दी | अभिमन्यु ने अब अपने रथ का पहिया उठा लिया | लेकिन आतताई उसे भी काट के तैयार हो गए | एक गदा लेकर फिर अभिमन्यु ने अश्वत्थामा से युद्ध किया | अश्वत्थामा जान बचा कर दुस्साशन के पुत्र दुर्मासन के पीछे जा छुपा | दुर्मासन से लड़ते हुए अभिमन्यु भी मूर्छित हो गया और दुर्मासन भी, लेकिन दुर्मासन पहले उठ खड़ा हुआ, जब तक अभिमन्यु संभालता, उसके मुकुट पर प्रहार हुआ | गिरते गिरते भी अभिमन्यु ने दुर्मासन को मार डाला | दुर्योधन ने कर्ण को उसके तीन पुत्रों के वध की याद दिलाते हुए उकसाना शुरू किया, क्रोधित कर्ण ने अर्जुन से अपने पुत्रों की हत्या का प्रतिशोध लेने के लिए गिरते हुए अभिमन्यु के शरीर से तलवार पार कर दी |
अभिमन्यु बालक था | अभिमन्यु मारा गया |
योद्धा का बच्चा वहां भी था, आर्मी स्कूल के बच्चे यहाँ भी | सात वहां भी थे, शायद सात यहाँ भी | चालीस की मौत पर “हा हुसैन हम न हुए” का विलाप करते तो देखा है हमने, एक सौ चालीस पे कोई रोयेगा ?
(17 December, 2014)