बिलकुल Punching Bag समझ रखा है ? PK

बचपन में ही लक्षण दिख जाते हैं | फिर परिवार का भी बड़ा असर होता है | हमपे भी हुआ और दस बारह के होते होते दादाजी और माँ को समझ में आ गया की बहुत तेज़ी से पढता है | तो और निखारने के लिए ज्यादा तेज़ी से पढ़ने के और नुस्खे सिखाये जाने लगे हमें | मगर जैसे हर चीज़ का फायदा नुकसान दोनों होता है, वैसे ही इसका भी नुकसान हुआ | अब हम “माया”, “इंडिया टुडे” तो पढ़ ही जाते थे साथ ही माँ की “मनोरमा” भी चाट जाते थे |
अब क्या हो तो बहलाने के लिए हमें पुराण दिखा दिए गए | अब गायत्री परिवार वाले “प्रज्ञा पुराण” में किस्से होते थे ढेर सारे इसी चक्कर में दसवीं कक्षा तक पहुँचते पहुँचते हम छः सात पुराण पढ़ चुके थे | बड़े अनोखे अनोखे किस्से होते हैं उनमे, ऊपर से जिस देवी देवता के नाम पे पुराण होता है उनकी तारीफ़ भरी रहती है |
एक बार ऐसा ही बड़ा मजेदार किस्सा शिव जी का पढ़ लिया | उन्हें सबसे सीधा सादा वाला भगवान् माना जाता है, नाम भी भोले नाथ रखा हुआ है | हुआ यूँ की एक गाँव में एक मंदिर था | वहां शिवलिंग भी था, उसके ऊपर कलश टंगा था और उसके ऊपर घंटा | किसी भक्त ने पता नहीं कैसे मंदिर में सोने का घंटा दान कर दिया था | एक दिन गाँव से गुजरते एक चोर की नजर घंटे पर पड़ी |
मारे लालच के चोर बेचारा बेचैन हो गया | कैसे चुरा लूँ सोने का घंटा इस जुगत में लग गया | लेकिन मंदिर था गाँव का तो पुजारी तो सुबह सुबह ही हाज़िर हो जाता था ब्रह्म मुहूर्त में और सूर्यास्त तक वहीँ रहता था | गाँव से भी कोई न कोई पहुंचा रहता था दिन भर पूजा करने | दिन भर चुराने में बड़ी समस्या थी | पकड़े जाने का खतरा था |
आखिर चोर ने एक युक्ति सोची, कहीं से भगवा धोती ले आया | अपने बढ़े हुए बाल दाढ़ी का फायदा उठाया और जा के शिवलिंग पर लगातार जल चढ़ाना शुरू कर दिया | पुजारी जी भी भक्त को देख कर पुलकित हुए | थोड़ी फ़ुर्सत हो गई उन्हें भी तो इधर उधर का कुछ काम भी कर पाते थे | इसी तरह पूरा महिना निकल गया | अब गाँव के लोग और पुजारी सब उसे साधू समझने लगे | उधर शिव जी नए भक्त से परेशान थे | जल चढ़ाना बंद ही नहीं करता था | थोड़ी थोड़ी देर में लोटा भर के डाल दे शिवलिंग पर !
एक दिन आखिर चोर शाम तक जल चढ़ाने में जुटा रहा | पंडित जी ने सोचा भक्त को कैसे मना करें तो शाम को भी दरवाजा मंदिर का खुला छोड़ गए | चोर प्रसन्न हो गया | तसल्ली करने के लिए चोर जल चढ़ाता रहा | रात के नौ बजे फिर दस, धीरे धीरे बारह भी बज गए | चोर पानी भरने के बहाने मंदिर से निकला, इधर उधर देखा, कोई नजर नहीं आया | वापिस जा के उसने एक लोटा जल और चढ़ाया, खुश होकर सोचने लगा आज तो सोने का घंटा हाथ लगेगा ही जरूर | उसने घंटे की तरफ हाथ बढ़ाया |
इधर शिव जी लगातार इस नए भक्त के जल चढ़ाने से परेशान होकर चोर पे कड़ी नजर रखे बैठे थे | घंटा जरा ऊँचा टंगा हुआ था हाथ चोर का पहुंचा नहीं | उचक के शिवलिंग के ऊपर टंगा कलश पकड़ के उसने घंटा उतारने की फिर कोशिश की | कलश के साथ टंगे बेलपत्र और जा गिरे शिवलिंग पर | शिव जी अब तो नए भक्त से प्रसन्न भी हुए जा रहे थे परेशान भी ! चाहिए क्या वो मांगता ही नहीं था, लेकिन पूजा भी बंद नहीं करता था !
ऐसे देखें तो भगवान् अंतर्यामी होते हैं, भक्तों की मंशा समझते उन्हें देर नहीं लगती | मगर भोलेनाथ औघड़ दानी कहे जाते हैं | अपने ही सर पर हाथ रखने दौड़े भस्मासुर को भी वरदान दे डालते हैं | यही कारण रहा है की राक्षस सारे भोले बाबा के ही पास पहुँचते हैं | पहले नहीं जांचा भगवान ने ऐसे ही परेशान होने लगे भक्त को देख कर !
आखिर जब ऊँचे टंगे घंटे तक बेचारे चोर का हाथ नहीं पहुंचा तो उसने सोचा किसी ऊँची चीज़ पे चढ़ के इसे उतारा जाए | अब मंदिर में कोई टेबल कुर्सी तो थी नहीं, चोर ने आव देखा न ताव, शिवलिंग पे ही जा चढ़ा ! उधर पहले से ही परेशान शिव जी से अब बर्दाश्त नहीं हुआ ! उन्हें लगा जब जल और बेलपत्र चढ़ा देने से मैं नहीं आया तो भक्त खुद को ही मुझपे चढ़ा रहा है !! फ़ौरन चोर के सामने प्रकट हुए !! ऐसी भक्ति दिखाने के लिए चोर को शिव धाम ले चले अपने साथ |
अब ये तो हमारा सनातन धर्म है | मंदिर से घंटा चुराने आये चोर को भी स्वर्ग मिल जाता है | हिरानी थोड़े लालच में आ भी गए तो क्या है ? करने दो !! कल जब गोडसे की फिल्म पर हंगामा होगा तब पूछेंगे | बेटा हमारी “कलात्मक अभिव्यक्ति” और “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” का क्या हुआ ? बिलकुल Punching Bag समझ रखा है ? पाखंडी धूर्त कहीं के !!

(29 December, 2014)