बातें याद रखने के मामले में हम हमेशा अच्छे थे | दर्ज़नों कहानियां याद रहती हैं, इसके लिए हम छोटा सा एक ट्रिक इस्तेमाल करते हैं | अपने दिमाग को एक कमरे जैसा समझते हैं, एक लिमिटेड स्पेस है इसमें | एक तय सीमा तक ही चीज़ें भरी जा सकती हैं | उस से भी जरूरी है सही तरीके से arrange कर के रखना, अगर सारी सूचनाएं बेतरतीब ढंग से पड़ी हों तो अपने जरूरत के वक़्त याद ही नहीं आएँगी | तो जैसे ही कभी गलती से क्रिकेट का स्कोर नजर आ जाता है तो हम अपना ध्यान दूसरी साइड ले जाते हैं, फिल्म की हीरोइन का नाम भी याद नहीं रखते | इस तरह फालतू information घुसती ही नहीं दिमाग में, उसके बाद हर खबर को किसी न किसी चीज़ से जोड़ के याद रखते हैं, जैसे जब Believe की spelling “belive” याद रहती थी तो “Never believe a lie” याद कर लिया | जैसे झूठ में “lie” होता है वैसे ही “believe” में भी “lie” होता है |
इतनी सारी मेहनत के बाद भी सारे किस्से हमें याद नहीं रहते | अब जैसे एक किस्सा किसी राजा का था | राजा का जंगल से गुजरते समय किसी तांत्रिक से झगड़ा हो गया | राजा ने फ़ौरन तलवार निकली और तांत्रिक का सर काट दिया, तांत्रिक को कुछ करने का मौका ही नहीं मिला | राजा तो वापिस अपने महल में लौट आया लेकिन पीछे तांत्रिक की जादूगरनी चेली ने राजा पर तेज़ी से बूढ़े होने का जादू कर दिया |
अब राजा बेचारा एक एक दिन में एक एक साल बुढा होने लगा, हफ्ता बीतते बीतते 45-50 का राजा 60 साल का बुड्ढा हो चला | उपर से ऐसे जादू की चिंता तो कमज़ोर भी होने लगा | राजा और सभी मंत्रियों ने बैठक की, जादूगरनी के बारे में पता लगाया | आखिर तय हुआ की जादूगरनी के मरे बिना इस जादू से छुटकारा नहीं है | जादूगरनी को मारना भी आसान नहीं था | उसकी जान एक तोते में बंद थी और तोते का पिंजड़ा एक पहाड़ी के ऊपर था | पिंजड़ा पहाड़ी से उतारे बिना तोते तो मारा नहीं जा सकता था इसलिए राजकुमार तोते को उतारने निकला |
लेकिन जैसे ही राजकुमार पिंजड़ा लेकर उतरने लगा पीछे से मंत्रियों की आवाज़ आई | राजकुमार पीछे मुड़कर देखने लगा, जैसे ही पीछे मुड़ा वो पत्थर का हो गया और तोता वापिस अपने पिंजड़े में जा बैठा | मंत्रियों ने इस बार दुसरे राजकुमार को और समझा बुझा कर भेजा | अच्छे से सिखाया, बेटा पीछे से चाहे किसी की आवाज़ आये पीछे मुड़कर मत देखना | दूसरा राजकुमार भी पिंजड़े से तोते को लेकर चला तो पहले पीछे से मंत्रियों की आवाज़ आई, लेकिन वो नहीं मुड़ा | थोड़ा और आगे आया वहां बड़े राजकुमार की पत्थर की मूर्ति थी, पीछे से प्रधानमंत्री की आवाज़ भी आ रही थी लेकिन राजकुमार फिर भी नहीं मुड़ा | थोड़ा और आगे आया था की इस बार पीछे से उसके परिवार के लोगों की आवाज़ आई, राजकुमारियों की, बड़े राजकुमार की, रानी की ! इस बार दूसरा राजकुमार मुड़ के देखने लगा | जैसे ही पीछे मुड़ा वैसे ही वो भी पत्थर का हो गया | तोता फिर उड़कर पिंजड़े में जा बैठा |
कहानी हमें यहीं तक याद है | शायद तीसरा राजकुमार पिंजड़े से तोते को लेकर नीचे तक आ गया होगा |
जब पिछले साल को याद करने बैठे तो ऐसा ही हो गया | पहली बार में कुछ व्यावसायिक नुकसान याद आये, कई घंटे पत्थर हुए रहे | फिर दोबारा याद किया तो कुछ व्यक्तिगत नुकसान भी याद आ गए, इस बार फिर से कुछ घंटे बर्बाद हो गए | तो अब पीछे देखना बंद, अब आगे चलते हैं | पहिये की तरह घूम कर जनवरी फिर से आ ही गई है तो समय के पहिये के साथ एक चक्कर और लगाते हैं | कुछ नए सपने सजाते हैं, कुछ नए दोस्त बनाते हैं |
सभी मित्रों, परिजनों को एक नयी शुरुआत की शुभकामनायें !!
(01 January, 2015)