एक पुराना सा तालाब का किस्सा था जिसमे एक गाँव के बाहर के तालाब के आस पास कई पशु पंछी रहते थे | जैसा की पुराने किस्सों में होता है वैसे ही, इस तालाब के मेंढक की दोस्ती पास के पेड़ पर रहने वाली चिड़िया से थी | शुरू शुरू में तो कहानी अच्छी थी लेकिन थोड़ी ही देर में कहानी में villain की entry हो गई | वहीँ से गुजरता एक नाग तालाब पेड़ और खाने का इतना अच्छा इंतज़ाम देखकर रुक गया | सिर्फ खाने की बात की है, पीने की बात नहीं की क्योंकि सांप पानी भी नहीं पीते |
नेवला घात लगाये तालाब के पास बैठा रहा, अगली बार सांप जैसे ही बिल से बाहर निकला, नेवला उसपर टूट पड़ा | जोरदार लड़ाई हुई, लेकिन सांप ज्यादा देर टिक नहीं पाया | थोड़ी देर में नेवला सांप को मार के खा गया | चिड़िया जो की पेड़ पर से ये लड़ाई देख रही थी, उड़ कर वहां से दूर चली गई और किसी और पेड़ पर अपना घोंसला बनाया | मेंढ़क कहीं नहीं जा पाया | एक दो दिन तो सांप से नेवले का पेट भरा लेकिन उसके बाद से सांप ने मेंढ़क मार मार के खाना शुरू कर दिया | मेंढ़क का क्या हुआ होगा ये बताने की जरूरत नहीं |
अभी ऐसा ही एक “ओंकारा” नाम की फ़िल्म में डायलॉग सुनाई दिया था | उसमे क्या होता है की बड़े नेता जी होते हैं नसीरुद्दीन शाह और उनके खिलाफ कप्तान नाम का कोई टटपूँजिया गुंडा अपना उम्मीदवार खड़ा करने की सोचता है | ये सुनकर कोई कहता है “इ कप्तान बड़ी लकड़ी काहे उठा लिया है ?” लेकिन कप्तान सुधरता नहीं है, अपने उम्मीदवार को चुनाव में धकेलने की पूरी तैयारी कर लेता है | आखिर कोई तरीका नहीं देखकर नेताजी को सामने आना पड़ा | विरोधी उम्मीदवार के चुनाव लड़ने की संभावना तो जाती ही है, कप्तान भी जाता है |
जब महिषासुर की पूजा करने की बात होने लगेगी तो फिर कितने दिन लगते “गॉड से” का मंदिर बनने में ? जब pk में धर्म का मजाक उड़ने लगे, हैदर में चलती रहे, न्यू ईयर और क्रिसमस छोड़ के बाकि त्योहारों में अलग अलग किस्म के विरोध होंगे, तो mock drill में भी skull cap तो दिखेगा ही.. एक पर रोक और बाकि पर छूट कितने दिन चलती ?
इ कप्तान, बड़ी लकड़ी काहे उठा लिए ?
(January 2, 2015)