अरविन्द केजरीवाल की एक किताब आती है “स्वराज” नाम की, बड़ी छोटी सी किताब है | लोकतंत्र क्या होता है ये समझाने की कोशिश की है इन्होने इस किताब के जरिये | अगर कभी आप ये किताब पढ़ें तो इसमें लिच्छवी गणराज्य का जिक्र आता है |
लिच्छवी बिहार का एक बहुत पुराना गणराज्य था, सबसे पहले लोकतांत्रिक सरकार का श्रेय अक्सर इस गणराज्य को दिया जाता है | चाणक्य और चन्द्रगुप्त ने इस गणराज्य का विध्वंस कर दिया था |
जो किस्सा किताब में है वो वैशाली (लिच्छवी की राजधानी) की नगरवधू का है | एक आम्रपाली थी जो इतनी सुन्दर थी कि अक्सर उसे पाने की लालसा में पुरुष आपस में लड़ पड़ते | कानून व्यवस्था खतरे में आ गई | आखिर जनता ने सभा बुलाई और सबने कहा की इस स्त्री को “नगरवधू” बना दो | इस तरह ये किसी एक की नहीं बल्कि पूरे नगर की होगी, स्त्री को वेश्या बना देने की तैयारी हुई |
जब स्त्री उस सभा में आई और उसे सभा के फैसले की जानकारी मिली तो उसने अपनी कुछ शर्तें सभा के समक्ष रखी | शर्तें मान ली गई और इस तरह वो सुन्दर स्त्री आम्रपाली वैश्या हो गई, “वैशाली की नगरवधू” | इस किस्से के साथ केजरीवाल लिखते हैं कि, जो बात समझाई जा रही है वो है कि जनभावना ही सर्वोपरी है |
भीड़ की भावनाओं को समझते हुए कहा था कुमार विष वास ने | सभा में गूंजते ठहाके तो आपने सुने ही होंगे | आश्चर्य मत कीजिये कुमार विष वास के बयान पर भाई, स्त्री को वेश्या बनाना भी जायज है उनके “स्वराज” में.. आश्चर्य कैसा ??
(January 31, 2015)