“अब खूबसूरत कब कहा है तुम्हें ? हमें पसंद हो इतना ही तो बताया था न ?”, बड़ी मुश्किल है, लड़कियों को ख़ूबसूरत होना पता नहीं क्यों जरूरी लगता है, शेष सोचता रहा | ईति का गुस्सा अभी ठंडा नहीं हुआ था, आंसू कलाई से पोंछते हुए पलटी | “काजल थोड़ा सा फ़ैल गया है !” शेष रुमाल बढ़ाता हुआ कहने लगा |
“छुओ मत मुझे !”, ईति फट पड़ी, काफ़ी देर से चुप थी | “मेरे सांवले होने का हमेशा से पता था तुम्हें, फिर भी मुझे पसंद करने का नाटक करते रहे !” शेष ने कंधे उचकते हुए पुछा, “लेकिन तुम्हारे रंग से तुम्हें पसंद करने का क्या लेना देना ? खूबसूरत हो इसलिए कहाँ प्यार किया था ? प्यार है इसलिए ख़ूबसूरत लगती हो न !”
“पहले कहते तो मैं शादी में क्यों आती ? सब मेरे रंग की बात कर रहे थे |” ईति की शिकायत बाकि थी | “लेकिन वो शिकायत हमने कब की ? हमारा तो ध्यान भी नहीं गया था अब तक |” अब शेष को हंसी आ रही थी, और ईति को समझ आ रहा था की उस से बेवकूफी हो गई है |
“तुम्हें गुस्सा नहीं आता ? हर बार इतनी बातें सुन कैसे लेते हो ?”, ईति ने शेष से रुमाल लेते हुए पुछा, “देखो काजल साफ़ हुआ ?”
ये जो रंग है आपका..
वो फरिश्तों की भूल से..
वो तिल बना रहे थे..
स्याही फ़िसल गई..
“अब वापिस चलें पार्टी में ?”, रुमाल वापिस ज़ेब में रखते शेष ने पुछा, जवाब में जवाब नहीं सवाल आया, “तुम हमेशा ऐसे ही रहोगे ? बूढ़े होने पर भी ?” ईति ने फिर पुछा |
“अगर तुम ऐसी ही खूबसूरत रहोगी तो... चलें अब ?”
(February 5, 2015)