महाभारत का युद्ध चल रहा था, कई महारथी रण में खेते रहे ! भीष्म से द्रोह के कारण कर्ण युद्ध में नहीं आता था | लेकिन जब भीष्म शर शैया पर गिरे तो कर्ण की आँख से भी आंसू बह निकले !!
कर्ण भीष्म के पास अन्धकार में पहुंचे, भीष्म ने आहट से पहचान लिया | बड़े प्रेम से कहा आओ वत्स ! कर्ण हैरान, परेशान ! जीवन भर जिसका द्रोह सत्ता का पिट्ठू और मठाधीश समझ के करता रहा वो आखरी क्षणों में ऐसे प्रेम से पुकार रहा है ? और आहट से पहचान लिया ऐसा कैसे ?
गुरुवर मैं जीवन भर द्रोह ही करता रहा आपका, लेकिन अंत समय भी आप मुझसे ऐसे प्रेम से कैसे बात करते हैं ? क्या मेरे पूर्व के अपराध आपको नहीं दिखते ? मेरा बलात्कारियों को समर्थन नहीं दीखता ? आहट शब्दभेदी बाण चलाने वाले पहचानते हैं, फिर भी मेरे पापों को छोड़ आप आओ वत्स कहते हैं ? एकलव्य जैसा अंगूठा मांगने की योजना तो नहीं ?
तू दानी है वत्स, भीष्म मुस्कुराते कहते गए, तेरा कवच कुंडल भी तू दे देगा | बता सब छोड़ के तूने क्या पाया ? कर्ण तन गया गुरुवर संतोष !! मृत्यु के समक्ष ये पश्चाताप तो न होगा की ये करना चाहिए था और भय के मारे न किया ! तेरी पूँजी तो उतनी ही है, फिर मृत्यु अटल सत्य, शिविर को लौट जा कह कर भीष्म ने वार्तालाप को विराम दिया |
अगली सुबह इंद्र आये, कवच कुंडल के बदले दिव्यास्त्र दे गए | लेकिन विरोध था कृष्ण से, उन्होंने नयी युक्ति लगाई | कर्ण के दिव्यास्त्र के सामने बेचारे घटोत्कच को खड़ा कर दिया | दिव्यास्त्र भी क्षीण हुआ, कर्ण भी हतप्राण, महाभारत अभी शेष है |
किरण बेदी केजरीवाल के सामने चुनाव में होंगी, कर्ण के दिव्यास्त्र के सामने घटोत्कच !! महाभारत का रण शेष है बन्धु, कौन पापी और कौन पुण्यात्मा ??
भेद मिटता जाता है.. बोलो प्रेम से भारत माता की जय !!
(January 16, 2015)