काश ऐसा हो की तुझपे ही तेरा दिल आये..

आवाजें तरह तरह की कैसी प्यारी होती हैं, शायद यही वजह है की संगीत और गीत सबको पसंद होते हैं। वो भी भारी भरकम वज़नी आवाज़, कभी बेगम अख्तर जैसी, कभी थोड़े दिन पीनाज़ मसानी, कभी इला अरुण की।
जुकाम और थकावट से मेरी आवाज़ भी अचानक भारी हो गई है, अब Narcissius हुए जा रहे हैं ! अपनी ही आवाज़ प्यारी लगती है !!
हुस्न खुद इश्क के मुकाबिल आये..
काश ऐसा हो की तुझपे ही तेरा दिल आये..


नज़रें जिनकी मिली प्यार तो उनका था न ? फिर ऐसा कैसे की पूरे कमरे का माहौल ही खुशनुमा हो जाए ? ये अचानक सबके चेहरे पे मुस्कान कैसे आ जाती है ? उम्र बीस बाईस की हो की पचपन छप्पन की फ़र्क क्यों नहीं पड़ता ? “इश्क ते मुश्क छुपाये नहीं छुपदे..” आज इतने साल बाद भी सच कैसे है ?
सवाल तो कई हैं और आज मेरे बोलने का मन भी है | पुरानी फिल्मों की हीरोइन की सहेली हो गई हूँ शायद, जिसे दोनों को साथ देख कर अचानक ही खांसी आने लगती थी |
अब खांसी तो करीब 200 किस्म के विषाणुओं से होती है, किस किस को पूछिए, अब किस किस को रोईये ? आराम बड़ी चीज़ है मुंह ढक के सोइए | मुझे खांसी हो गई है, और वो भी अजीब अजीब से वक्त आती है, बिलकुल जालिम ज़माने की तरह प्यार मुहब्बत की राहों में दिवार खड़ी करती हुई सी !
दो तीन प्रसंगों में तो बाधा डाल ही चुकी हूँ और अब ज्यादा बोलने का मन भी कर रहा है | थकावट है, गले की आवाज भी “बिपाशा बासु” हुई जा रही है, भारी सी, और पता नहीं दिल्ली में वो कौन सा शब्द चलता है उसके जैसी | अपनी आवाज़ अचानक पसंद आ रही है, बड़ी अच्छी लग रही है |
और भी दावेदार हैं शायद इस कद के, आइये कदम मिलाईये | जो तू न हुआ कुछ भी न हुआ..


आदमी की बात में वजन होना चाहिए, सुनते सुनते कब बड़ी हो गई पता ही नहीं चला | फिर समझ आया, वजन आदमी की बात में होना चाहिए, औरतें तो शायद फुसफुसाती हुई ही सुहाती हैं |
खुल के ठहाका लगा दे ऐसी किसी लड़की से “दोस्ती” की जाती है, मम्मी से मिलवाने नहीं ले जाते उसे | एक पूरे बाजू पर टैटू बनवाई लड़की जब पूछती है मैं तुम्हारी मम्मी को पसंद तो आऊँगी न ? तो अचानक प्रचार में लड़के को गले की ख़राश की गोली लेनी पड़ती है |
अब आज मेरा ज्यादा बोलने का मन है और सर्दी जुकाम या शायद थकावट से आवाज़ भारी हो गई है | अपनी ही आवाज़ खुद को प्यारी लग रही है !


(February 5, 2015)

(Submitted - Tejee Isha)

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