एक बार एक राजा था, बाकि सारे राजा लोगों की तरह सनकी था | पैसे और पॉवर का थोडा घमंड तो जायज है !!
तो एक बार उसने अपने सारे मंत्रियों को इकठ्ठा किया और कहा की चलो भाई, ऐसा करो मेरे लिए एक वाक्य लिख के लाओ | उस वाक्य को सोने में मढ़ा जायेगा और दरबार में लगाया जायेगा | लेकिन वाक्य की एक ख़ास बात हो, अगर मैं खुश हो जाऊं तो उसे पढ़ के मुझे उदास हो जाना चाहिए, लेकिन कहीं अगर उदासी में पढ़ा तो उस एक वाक्य को पढ़ के मुझे खुश हो जाना चाहिए |
हँसता मुस्कुराता प्रधानमंत्री उस वाक्य को पत्थर पर मढ़ा कर वापिस दरबार में आ गया | बहस अभी जारी थी | राजा ने हंस कर पत्थर पर लिखा वाक्य पढ़ा और उसे दरबार में लगवा देने का आदेश दिया |
पत्थर पर लिखा था "ये भी गुजर जायेगा" |
अब खुश हो राजा तो इसे पढ़ के उसे पता होता की ये भी हमेशा के लिए नहीं है, और दुखी हो तो पता होता की दुःख भी हमेशा के लिए नहीं है |
इधर जान पहचान के कई फसबुकिया लेखकों ने लिखना बंद कर रखा है और मेरे पढ़ने के लिए कुछ अच्छा होता ही नहीं यहाँ | आप सब लोगों के लिए राजा साहब की लाइन याद आती है "ये भी गुजर जाएगा" !!
चलिए वापिस से लिखना शुरू कीजिये.. आपके दो चार शब्दों के ही इंतज़ार में तो हम सब हैं न ??
(January 3, 2015)