हर बात में कोई नहीं ?

"कोई नहीं" हर बात में कोई नहीं ? कोई बात नहीं का छोटा किया जाना कोई नहीं हो जाता है लेकिन बड़े शहर में कोई नहीं पूरा वाक्य है |

अकेले ही हो तुम चाहे जितनी भी भीड़ में हो, और जवाब वही कोई नहीं, बिलकुल अकेले हो और साथ कोई नहीं !


मान लेने में इतने साल लगा दिए ? भइये हम तो तुम्हें समझदारों में गिनते थे | हद है, खैर चलो, यहाँ पास में एक चोवमिन की दूकान है आओगे ? चाहो तो मोमो खाने भी चल सकते हैं, पैसे मैं दे दूंगा |


तुमसे पैसे का नहीं पुछा क्या हुआ अब ऐसे इधर उधर क्या झाँक रहा है भाई ?


ओह हाँ पैसे नहीं होंगे इस शहर में तो बाकि सारी चीज़ें भी नहीं होंगी !! और पैसे होंगे तो बाकि सारे गुनाह माफ़.. यहाँ ऐसे ही चलता है .. 

सबवे है न इस शहर में ! सड़कों के नीचे भी रास्ते होते हैं चल अब..

(January 19,2015)

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