शर्म तो आ रही होगी ??

एक लाल रंग की गाड़ी होती थी | बिलकुल वैसी जैसी आज कल सड़क के किनारे take food वाली वैन होती है | उसमें कुछ खाने का मिलता था, लेकिन पैसे हमें चुकाने नहीं पड़ते थे | जी हाँ साहब आप खा लीजिये, बल्कि बुला बुला के आपको खिलाया जायेगा, वो भी मुफ्त मुफ्त मुफ्त !!
क्या हुआ खबर हज़म नहीं हो रही ?? एक बार जरा पूछ के देखिये जिन्होंने 1993-96 के बीच किसी बड़े शहर के स्कूल में पढाई की हो और वो कह दे की उसमे मुफ्त की "maggi" ऐसे नहीं खायी थी हम मान लेंगे !!
तो साहब ऐसे होती है मार्केटिंग | आज अभी आपके घर की तलाशी में कितने पैकेट निकलेगी maggi ?? और कितने पैसे की ख़रीद के लाये हैं ?? और अगन 1996 से पहले आपके घर में maggi नहीं बनती थी तो नाश्ते में या खाने में बनता क्या था ?? भूखे थे क्या उस दिन ?
अब समझाईये की आज आपको maggi की जरूरत कैसे पड़ने लग गई है ?
ये मार्केटिंग की low level trick है .. इसी से चाय पत्ती बेचीं गई थी भारत में बहुत साल पहले, फिर "आयोडीन" नमक बेचा गया है, उसके बाद "maggi" और अन्य इंस्टेंट नूडल अब इस तरीके से सिर्फ चीज़ें बेचीं जाती हैं ये सोच रहे हैं तो फिर गलती कर रहे हैं |
अगर महाराष्ट्र के हैं तो अपनी बीवी को जरा पोहा बनाने कहिये, या साउथ में हैं तो इडली या उत्तपम बनाने या बिहार बंगाल की साइड हैं तो जरा चुडा दही परोसने कहिये (दही नहीं जमा पायेगी आपके घर में शायद कोई) अगर और ऊपर हैं तो पराठे बिना "बटर" के बनाने कहिये |
ये सब हो गए हैं "Vernacular" यानि की देहाती, और कहीं ये सब पसंद है आपको तो आप के जैसा गंवार तो "वैश्वीकरण" का शत्रु और बच्चों की तरक्की का दुश्मन है |
अब बताइए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारत में कब आई कब गई ? पुरुष महिला अनुपात हिन्दुओं में ज्यादा है या मुस्लिमों में ? आपके धर्म ग्रन्थ सही हैं या संविधान ? और क़ुतुब मीनार कौन सी जगह की ईटें तोड़ के बना था ??
बिना google search मेरी गारंटी आप इनमे से कुछ नहीं बता सकते.. फिर आप पढ़े लिखे होने का दावा भी करते हैं ??
शर्म तो आ रही होगी ??

(January 13, 2015)

http://palpalindia.com/2015/01/14/sarokar-maggi-food-Iodine-salt-news-in-hindi-india-83216.html

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