जय और मौसी

आज के दिन जो कहीं "शोले" नामक कालजयी कृति बनाई जाती तो कैसा होता ?
******************************************************************************************
दिल्ली वाली मौसी : माफ़ करना बेटा, मगर लड़की का हाथ (वोट) किसी को यूँ ही तो नहीं दे देते | इतना तो पूछना ही पड़ता है की लड़का करता क्या है ? कमाता धमाता कैसा है ? खानदान कैसा है ?
जय : अब IIT से निकलने के बाद थोड़ी समाज सेवा और कुछ दिन IRS की नौकरी की तो थी मौसी | मगर अब वो नौकरी तो रही नहीं |
दिल्ली वाली मौसी : हैं !! तो क्या कुछ भी कमाता धमाता नहीं ?
जय : राम राम मौसी ! मैंने ऐसा कब कहा है ? अरे कमाता है कमाता है ! मगर क्या है की वो चंदा विदेशों से रोज़ रोज़ तो नहीं आता न | फिर उसके लिए रोज़ दुबई चक्कर भी लगाना पड़ता है | सरकार ने इधर FCRA अकाउंट भी सील करना शुरू किया है तो...
दिल्ली वाली मौसी : हे भगवान ! तो क्या पैसों की हेरा फेरी का धंधा करता है ?
जय : अरे ना ना मौसी ! पैसों का लेन देन भी रोज़ कहाँ हो पाता है ? वो गडकरी वाले मामले में बेल लेने से मना कर दिया था, तो कई दिन तो बेचारे के अन्दर ही कट गए !
दिल्ली वाली मौसी : तो क्या जेल भी हो आया है ?
जय : क्रांतिकारियों का तो दूसरा घर ही जेल होता है मौसी ! वो तो विरोधियों ने इधर कुछ MMS बना कर फंसा दिया वरना मेरा दोस्त तो इतना भोला है की पूछो मत | तो मौसी मैं अपनी तरफ से ये रिश्ता पक्का समझूँ ?
दिल्ली वाली मौसी : वाह बेटा ! काम वो करता नहीं, अरबी शेखों से भी रिश्ते हैं, जेल वो जा चुका, और तो और MMS में भी आता है | मैं अपनी बेटी को कूड़े में फेंक दूंगी ( NOTA का बटन दबाकर) मगर ऐसे नासपीटे को हरगिज़ नहीं दूँगी |
फिर भी ये तो कहना ही पड़ेगा बेटा की तुमने उसकी एक बुराई नहीं की ! भगवान तुम्हारे जैसा भक्त सबको दे !!

(March 13, 2015)

Labels: