अच्छा काम करते रहिये

फेरीवालों को आपने अक्सर देखा होगा | अपार्टमेंट बढ़ने के साथ थोड़े कम हो गए हैं, मगर हमारा शहर छोटा है तो अभी भी आ जाते हैं | विदेशों में भी ऐसे फेरीवाले होते हैं | कई तो बड़े मेहनती होते हैं, काम के साथ साथ पढाई भी करते रहते हैं | ऐसे बच्चों को वहां भारत की तरह “बाल मजदूर” कहके दुत्कारते नहीं हैं, “छोटू” भी नहीं बुलाया जाता, वहां इन्हें “economically active children” कहते हैं |
ऐसा ही एक बच्चा सा फेरीवाला जब घर घर चक्कर लगा रहा था तो उसकी जेब में सिर्फ़ दस सेंट का सिक्का बचा था | दोपहर हो चली थी और बच्चा भूखा था, उसने सोचा की अगले घर पर वो खाने के लिए कुछ मांग लेगा | लेकिन जब वो अगले घर पे पहुंचा तो दरवाजा एक प्यारी सी बच्ची ने खोला | अब कोई बड़ा होता, तो उस से वो कुछ मांगता भी लेकिन बच्ची से मांगते उसे संकोच हुआ | वो सोच में पड़ गया की कुछ मांगे या नहीं मांगे |
आखिर उसने बच्ची से कहा की उसे प्यास लगी है और उस से एक ग्लास पानी मांग लिया | एक समस्या तो ये थी की लड़कियों से झूठ बोलना जरा मुश्किल होता है, दूसरी ये की भूख चेहरे पर ही लिखी दिखती है | तो लड़की की समझ में आ गया की ये लड़का भूखा है, वो अन्दर से एक ग्लास दूध ले आई | लड़का दूध गटागट पी गया | फिर उसने बच्ची से पुछा, “मुझे कितने पैसे देने होंगे तुम्हें ?” लड़की ने जवाब दिया की उसकी माँ ने उसे सिखाया है की अच्छे कामों के पैसे नहीं लिए जाते | इसपर लड़के ने उसे दिल से धन्यवाद दिया |
जब फेरीवाला लड़का वहां से निकला तो वो शारीरिक रूप से थोड़ा मजबूत तो महसूस कर ही रहा था, ईश्वर और इंसानियत में भी उसका भरोसा मजबूत हो गया था |
इस घटना को कई साल बीत गए | वो बच्ची बड़ी हो गई, एक दिन गंभीर रूप से बीमार पड़ गई | छोटे शहर के डॉक्टरों ने एक बड़े अस्पताल में जाने की सलाह दी, बड़े गायनाकोलिजिस्ट वहीँ होते थे | जब वहां के डॉक्टर ने सुना की लड़की किस शहर से आई है तो उनकी आँखों में अचानक चमक आ गई | फ़ौरन वो मरीज़ को देखने पहुंचे | मरीज़ ने इतने सालों बाद डॉक्टर को नहीं पहचाना, मगर डॉक्टर ने पहचान लिया था |
उसी दिन से डॉक्टर ने इस मरीज़ का ख़ास ध्यान रखना शुरू किया | बीमारी गंभीर थी
मगर कुछ ऑपरेशनों के बाद मरीज़ ठीक होने लगी | जब हस्पताल से छुट्टी की बारी आई तो डॉक्टर ने बिल अपने केबिन में मंगाया और उसपर कुछ लिख कर दस्तख़त कर दिया |
विदेशों ने इलाज़ बहुत महंगा होता है | लड़की सोच रही थी की जान तो बच गई मगर उसकी सारी जमा पूँजी बिल भरने में खर्च हो जाएगी | थोड़ा हिचकते हुए उसने बिल देखा,
बिल पर लिखा था :
“Paid in full with one glass of milk.”
Signed
Dr. Howard Kelly.
डॉक्टर होवार्ड केली का ये किस्सा कई रूपों में इन्टरनेट पर घूमता मिलता है | आधी हक़ीकत है और आधा फ़साना | डॉक्टर केली ने U. S. में Johns Hopkins नाम के पहले मेडिकल रिसर्च यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी, इसे आज भी दुनियाँ के बेहतरीन संस्थानों में गिना जाता है | 1895 में उन्होंने इसी जगह Gynecology और Obstetrics के विभाग को शुरू किया, पूरे जीवन वो यहाँ काम भी करते रहे और पढ़ाते भी रहे |
हालाँकि उन्होंने “Paid in full with one glass of milk.” क्यों लिखा इसकी कभी पुष्टि नहीं हुई मगर इतना तो ये एक लाइन बता देती है की जब आप एक अच्छा काम करते हैं तो वो घूम फिर कर आपके पास वापिस आ ही जायेगा | शायद कुछ साल लगें उसे वापिस आने में, तबतक अच्छा काम करते रहिये |

(March 11, 2015)

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