हां तो जमाना जब जरा
पुराना था तो आज जैसे तेज़ यातायात के साधन कम थे | लोग पैदल ही निकल लेते थे, जंगल
की पगडंडियों से | सबसे मुश्किल होता था बच्चों का गुरुकुल जाना | बड़ा कष्टसाध्य
था भाई | सोच के देखिये जरा अयोध्या में राम का राज्य और असम में गुवाहाटी में
वशिष्ट आश्रम !! पैदल जाने में कितनी दिक्कत हुई होगी उस ज़माने में !
खैर ! बच्चे फिर भी पढ़ने
जाते थे | तो ऐसे ही गाँव की पाठशाला से तीन चतुर बच्चे गुरुकुल के लिए निकले | दो
तो चपल थे एक था आलसी | गुरुकुल के पास आते आते एक मैदान में बैठ गया | कहने लगा
भाइयों मुझसे और नहीं चला जाता ! तुम लोग गुरुकुल जाओ मैं यहीं मैदान में खेती कर
लूँगा | लौटने लगो तो मुझे साथ कर लेना | बाकि दोनों मित्रों ने समझाने की बड़ी
कोशिश की | मगर ना, साहब नहीं उठे तो नहीं उठे !
खैर दो लोग गए गुरुकुल और
तीसरा वहीँ खेती करने लगा | दिन बीते, फिर हफ्ते, महीने, साल और आखिर दोनों
विद्यार्थी गुरुकुल से लौटे | रास्ते में तीसरे मित्र का खेत था तो उसे भी साथ ले
लिया | तीनो मित्र गाँव की ओर वापिस चले | चलते चलते एक सराय पर पहुंचे | रात वहीँ
गुजार के अगली सुबह आगे चलना तय हुआ |
अब समस्या थी की रात खाया
क्या जाए ? तो गुरुकुल से आयुर्वेद सीख के लौटा लड़का सब्जी ढूँढने निकला,
आटा-सत्तू की तो पोटली ही बाँध के निकले थे | सारी सब्जियां छान मारी बेचारे ने,
लेकिन किसी से वात बढ़ता था किसी से पित्त और किसी से कफ़ ! तो ज़नाब आखिर में ढेर सी
नीम की पत्तियां तोड़ के वापिस आये | एक नीम ही था जिस से कोई बीमारी नहीं होती |
अब नीम की पत्तीओं को
पकाने बैठे व्याकरण शास्त्री ! बर्तन से उबलने की आवाज़ आई खद बद, खद बद, खद बद, अब
बेचारे वैयाकरण परेशान !! चिल्लाये खद बद, नहीं होता !! खदं वद खदं वद बोल | अब
देगची कहाँ उनकी बात मानती ! तो गुस्से में उन्होंने बर्तन पर लात मार दी !
आखिर कम पढ़ा लिखा किसान
आया, थोड़ी लिट्टी बनाई, कुछ मिर्च बैंगन का भर्ता और फिर तीनो लोग खाना खा पाए |
कभी कभी ज्यादा ज्ञान भी
नुकसान कर जाता है |
अब पिछली बार का कोयला
खदानों की नीलामी तो याद ही होगी ! अपने युगपुरुष उसपर रोक लगवाने सुप्रीम कोर्ट
चले गए थे | याद है न ? अभी फिर हो रही है | बोली 150 रुपये प्रति टन से शुरू हुई
थी, अभी 1402 प्रति टन पर पहुँच गई है |
इकोनॉमिस्ट “असरदार” और
बेचारे चाय वाले में फ़र्क तो होता ही है | जय हिन्द !!
(February 17, 2015)