राजा तो नंगा है

स्कूल के ज़माने में किस्से हिंदी की किताब में भी होते थे और अंग्रेजी की किताब में भी | दोनों में लेकिन राजाओं के किस्से नहीं होते थे | हिंदी की किताबों में कभी भी लोककथाएं नहीं होती थीं, लोक कथाएं होती थी अंग्रेजी वाली किताब में | अब ये जो लोककथा वाला राजा होता था वो हमेशा सनकी टाइप का होता था | तो ऐसी एक कहानी थी “नंगे राजा की कहानी” |
इसका राजा बड़ा ही दुष्ट और घमंडी था | जब तक लोग इसके पसंद की बाते करते तब तक तो सब ठीक रहता | तारीफ़ सच्ची हो या झूठी उस से भी उसे फ़र्क नहीं पड़ता था, जहाँ कहीं किसी ने उसके खिलाफ़ बोला फ़ौरन उसे सज़ा दी जाती थी | लोग बड़े परेशान थे, रोज़ नए तुगलकी फ़रमान जारी करता और फिर नुकसान मंत्रिओं, सभासदों और जनता को झेलना पड़ता | उसकी इस आदत से एक दिन दो जुलाहे बहुत परेशान हो गए | उन्होंने बदला लेने की ठानी |
तो दोनों भाइयों ने भेष थोड़ा बदला और राजा के दरबार में जा धमके | बड़े भाई ने कुछ रेशम के थान दिखाए और कहा की ये सब मंत्रिओं के लायक कपड़े हैं, राजा साहब कुछ लेना चाहें तो उनके लिए स्पेशल अलग से तैयार करना होगा |
राजा ने पुछा कैसा स्पेशल ? तो भाइयों ने बताया की वो कपड़ा इतना महीन होता है की उसका वजन ही नहीं होता | ज्ञानी समझदार लोग ही उसकी कीमत पहचान सकते हैं, बेवकूफों को तो दिखता भी नहीं | राजा ये सुन के भौचक्का रह गया | उसने भाइयों से वही बनाने को कहा तो दोनों भाई बोले महाराज हमारे लिए एक कमरा एक करघा और सौ मुद्राएँ रोज़ की बस इतने का इंतजाम कीजिये हम कल ही काम पर लग जाते हैं | मैं कपड़ा बनाऊंगा भाई सिलेगा तो महीने भर में तैयार हो जायेगा |
कमरा और करघा सुई मुद्राएँ सब दे कर दोनों को बिठा दिया गया | अब एक भाई सारा दिन खाली करघा ठोकता रहता बिना ताना बाना चढ़ाये, और दूसरा भाई हवा में सुई घुमाता जैसे कुछ सिल रहा हो | देखा कर्मचारियों ने तो सोचा राजा को खबर करें ! राजा साहब को जब कहा गया एक बार आप भी चलकर काम की प्रगति देखते तो राजा भी कमरे में पहुंचे | दोनों भाई काम करने का बहाना करते रहे | अब उन्होंने कह रखा था की ज्ञानी ही इस कपड़े की सही तारीफ़ कर पाएंगे तो राजा अपने को ज्ञानी दिखाने के लिए कपड़े की तारीफ़ करने लगा, वाह वाह क्या रंग है ! क्या डिजाईन है !
विरोध का नतीज़ा सबको पता था तो कोई कुछ नहीं बोला | तय तारिख को दोनों भाइयों ने राजा को नंगा किया, कपड़े पहनाने का बहाना किया और दरबार में भेज दिया | अपनी झूठी शान में राजा भी नंगा दरबार में जा पहुंचा | सब लोग कहने लगे वाह क्या ड्रेस है, क्या सुन्दर रंग है ! राजा ने भी सोचा सबको दिख रही है ड्रेस मुझे ही नहीं दिख रही होगी | वो इतराता हुआ सिंघासन की तरफ बढ़ा | इतने में सभा में मजूद एक बच्चा हंस पड़ा, चिल्लाया, अरे राजा तो नंगा है !!
सारी सभा सन्न रह गई, पिन ड्राप साइलेंस ! भैया राजा तो सचमुच नंगा है !
अब ये कहानी याद आई माइनॉरिटी विंग वाले ऑडियो को सुनकर जिसमे कहते हैं की एक समुदाय विशेष मोदी जी को तो वोट देगी नहीं, और कांग्रेस भी लड़ने लायक स्थिति में नहीं है तो हमें ही दे दो | बेचारे समुदाय विशेष के लोगों ने एक मुश्त वोट केजरीवाल को ठोक दिए | अब वही तो एक सांप्रदायिक शक्तियों को रोक सकता था | सेक्युलर और कोई बचा कहाँ था ?
अब बेचारे हमारे सम्प्रदाय विशेष के भाई बहन और मितरों को राजा टाइप ही फीलिंग आ रही होगी | ठगे गए भाई, टोपी सचमुच पहना दी किसी ने... ऊपर से साहब ये चौथे खम्बे वाले ! दलाली में शामिल पत्रकार का नाम तो बताते नहीं बस चिल्लाये जा रहे हैं...
भैया राजा तो नंगा है !!

(March 13, 2015)

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