पोठी पढ़ी पढ़ी जग मुआ...

साधू अक्सर सज्जन होते हैं, कुछ कुछ साधू के भेष में लम्पट भी होते हैं | इतिहास के साथ अच्छी बात ये है की अच्छे साधू को तो कहानियों में याद रखा जाता है, दुष्टों को लोग भूल जाते हैं | ऐसे ही एक साधू का किस्सा अक्सर लोक कथाओं में सुनाया जाता था | ये साधू काशी से हिमालय की तरफ़ तपस्या करने के इरादे से चले | हिमालय की तराई में पहुंचकर उन्होने अपने लिए एक कुटिया बना ली |
ज्यादातर समय तो ध्यान में जाता था उनका मगर अक्सर खाने की तलाश में आस पास के जंगलों में कन्द-मूल इकठ्ठा करने भी चले जाते थे | वन में अनेक पक्षी थे, अक्सर कलरव कर रहे होते तो साधू भी रूककर उन्हें देखते | पहाड़ी मैना भी बहुत थी इलाके में उन्हें बोलना सिखाना आसान होता है | साधू सोचते की अच्छी कुछ बाते, कुछ श्लोक इन्हें रटा दिए जाएँ तो जहाँ भी ये पक्षी जायेंगे वहां तक अच्छे विचार भी जायेंगे | ये सोचकर वो हर शुक- सारण को सिखाने का भी प्रयास करते थे |
एक दिन जंगल में टहलते टहलते उन्होंने एक व्याध को देखा | बहेलिया अपना रोज़ का काम कर रहा था | पहले तो उस शिकारी ने जाल बिछाया फिर उसपर दाना डाला और छुप कर बैठ गया | बहुत से तोते, मैना जैसे ही दाना खाने आये वो जाल में फंस गए | अब साधू चिंतित हो गए | शिकारी तो अपना काम ही कर रहा था, अपनी जीविका अर्जित करने से उसे रोका जाना अनुचित होता | वहीँ पक्षियों का आजाद घूमने की बजाये कैद हो जाना भी उन्हें ठीक नहीं लग रहा था |
अंत में साधू ने एक युक्ति सोची, उन्होंने तय किया की सारे तोता मैना को वो रटा तो सकते ही हैं | शिकारी रोज़ रोज़ तो आता नहीं, जब तक अगली बार आएगा, पक्षी सीख जायेंगे | उसी दिन से उन्होंने पक्षियों को रटाना शुरू कर दिया, “शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा, जाल में फंसना मत !!” अब तोता, मैना तो जल्दी ही आदमी की आवाज की नक़ल उतारने लगते हैं | रोज़ के अभ्यास और साधू की लगातार मेहनत से पक्षी कुछ ही दिन में रटने लगे “शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा, जाल में फंसना मत !!”
साधू प्रसन्न भी हुए निश्चिन्त भी, कुछ दिन बाद शिकारी फिर से आया | उसने जाल बिछाया दाना डाला और इंतज़ार करने लगा | साधू ने देखा तो वो भी रुक कर आगे का हाल देखने लगे | लेकिन पक्षी फिर आये और दाना खाने के चक्कर में जाल में जा फंसे ! शिकारी जब पक्षियों को पिंजड़े में डाल कर चलने को हुआ तो अचंभित साधू उसके नज़दीक पहुंचे | शिकारी साधू को देखकर रुका और प्रणाम करने लगा, इतने में पक्षियों ने साधू को देखा | एक स्वर से सारे पाठ करने लगे “शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा, जाल में फंसना मत !!” शिकारी ने साधू को आश्चर्य से देखा फिर सारी बात समझ के मुस्कुराया | साधू भी हंस पड़े, उन्हें समझ आ गया था
पोथी पढ़ी पढ़ी जग मुआ पंडित भया न कोई...
बड़ी प्रसिद्ध सी चौपाई है, जिसका मतलब होता है की किसी लिखे हुए को रट लेना कभी भी काफी नहीं होता | उसके अर्थ को समझना और जीवन में उतारना बहुत जरुरी होता है | अब केजरीवाल ने अपने वालंटियर्स को सिखा दिया की पैसे दे कर कोई फोड़ने की कोशिश करे तो मना मत करना | चुपके से उनका स्टिंग बना लेना | ये नहीं बताया की उनका स्टिंग नहीं करना, विरोधियों का करना है | अब इलज़ाम किसी दाढ़ी वाले पे डालने की तैयारी कर रहे हो क्या ?
बेटा लच्छन ठीक नहीं लग रहे तुम्हारे, तुमसे न हो पायेगा !!

(March 12, 2015)

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