तुम्हारा जाना...

“हम लोग हमेशा अजमेरी गेट क्यूँ आते हैं ? तुम कभी पहाड़गंज क्यों नहीं ले चलते ?”
“इधर से सोलह नंबर प्लेटफार्म पास होता है न ! उधर से दूर तक सीढियां चढ़नी होंगी |”
“तो क्या हुआ तुम एक बार दिखाने के लिए उधर से नहीं ला सकते ?”
“हां क्यों नहीं ! लेकिन फिर टाइम ज्यादा लगेगा और तुम्हें तैयार होने के लिए कम टाइम मिलेगा न ?”
“नहीं तुम दुष्ट हो गए हो शादी होते ही तुम्हारे नखरे शुरू हो गये थे | तुम चाहते हो मैं जाऊं और तुम फिर अकेले ऐश करो ! मुझे सब पता है |”
“अब ये क्या बात हुई, आओ चलें B1 ही है न अपना रिजर्वेशन फ़ोन में देखना |”
“तुम सारा खाना भी फेंक दोगे न ? मैंने फ्रिज में रखा था |”
“चार दिन का खाना बना के जा रही हो ? हद है ! मुझे आता है खाना बनाना |”
“मुझे पता था तुम फेंक दोगे |“
“नहीं बिलकुल नहीं, क्यूँ फेंक देंगे ? वैसे बनाया क्या है गोभी ? और धनिये की चटनी भी होगी ढेर सा लहसन मिर्च डाल के | रोटियां नहीं जमा की पांच दिन की ?”
“चुप रहो, कितनी भी मेहनत कर लो तुम्हें तो फ़िक्र ही नहीं है | मुझे पता था तुम सब फेंक दोगे मैं ही पागल थी की मर मर के बनाती रही |”
“चलो ये रही तुम्हारी सीट, अब बैठो, और सिर्फ चार दिन तो हैं एक जाने में चला जायेगा एक आने में फिर Thursday से Monday ही बचा न बस, Tuesday फिर से ट्रेन में फिर यहाँ वापिस ! और हम खाना भी नहीं फेंकेंगे पक्का...”
“तुम छुट्टी नहीं ले सकते थे, मैं अकेले ट्रेन में बोर हो जाउंगी |“
“तो फ़ोन तो है न ? sms कर लेना या फिर फ़ोन ? और होली में तो घर जाना चाहिए न ?”
“अकेले थोड़ी न शेष, तुम भी आते न |”
इतने में खिड़की के पास बैठी आंटी मुंह ढक के मुस्कुराना शुरू कर चुकी थी | शेष और ईति दोनों का ध्यान साथ ही गया | “तुम होली में कोई हुडदंग तो नहीं करोगे न ?”
“नहीं ईति ... प्रॉमिस”
“पहले ही कहा था न मेरी छुट्टियाँ कम होती हैं, शादी क्यों कर ली मुझसे ?”
“शायद मैं तुमसे ज्यादा बुद्धू थी, जाओ अब ट्रेन की सीटी आ गई, फ़ोन करना, और खाना फेंकन मत...”
ट्रेन घर जाती थी, हर रोज़ सिर्फ़ हम उसमे बैठे नहीं होते थे | कुछ खाली सा लगा, शेष ने अपना पर्स और मोबाइल टटोल के देखा | दोनों अपनी सही जगह पे थे | ट्रेन स्टेशन से बाहर जा चुकी थी, ये पता नहीं क्या खाली खाली सा लगता रहा | पटरियों की तरफ देख के शेष फिर मुस्कुराया |
“कुछ रोज़ ये भी रंग रहा इंतज़ार का..
आँख उठ गई जिधर बस उधर देखते रहे..”


(March 04, 2015)

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