सलीम भाई की टांग

सलीम भाई बड़े परेशान थे, तबियत ठीक नहीं लग रही थी | पहले तो घर में इलाज़ हुआ फिर डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी गई | सलीम भाई डॉक्टर के पास पहुंचे, लम्बी जांच चली कुछ न निकला ! आखिर में डॉक्टर की निगाह सलीम भाई के बाएं पैर पर पड़ गई | डॉक्टर ने कहा, ये क्या हुआ तुम्हारे पैर को ? कहीं यही तो बिगड़ी तबियत की जड़ नहीं ?
पैर देखा गया तो वो काफी ऊपर तक नीला पड़ चुका था | डॉक्टर ने चकोटी काट के देखा, रंग की आगे पीछे ऊपर नीचे जांच की और कहा, सलीम भाई आपका पैर तो सड़ रहा है ! जहर काफ़ी तेज़ी से फ़ैल रहा है | इसे काटने के अलावा कोई चारा नहीं | जान बच जाए चाहे लंगड़ा ही होना पड़े, ऐसा सोचकर सलीम भाई ने एक टांग कटवा ली | थोड़े दिन ठीक रहे मगर कुछ महीनों बाद तबियत फिर से बिगड़ी |
डॉक्टर साहब ने फिर से पूरी जांच की और इस बार देखा की दूसरी टांग नीली पड़ रही है | डॉक्टर ने दूसरी टांग भी कटवा लेने को कहा | इस तरह सलीम भाई की दोनों टाँगे कट गई | नकली टांग लगा कर सलीम भाई जैसे तैसे चलते थे | एक दिन नकली टांग खोल कर रखने लगे की देखा की नकली टांग भी नीली पड़ गई है ! अब तो सलीम भाई की काटो तो खून नहीं वाली हालत हुई !
घर वाले भी सब देखने इकठ्ठा हो गए की ये कौन सा जहर है जो लकड़ी की टांग में भी फैला जा रहा है ! थोड़ा उल्टा पुल्टा के टांग को सलीम भाई के पड़ोसी ने भी देखा | फिर कहा, अमां मियाँ ! ये जहर वहर कोई नहीं, तुम्हारी चारखाने की नीली लुंगी रंग छोड़ती है !!
अब कश्मीर में इतने साल इलाज़ डॉक्टरों का तो देख ही लिया है | हमारी पड़ोसी मान कर ही सुन लो ! प्रधानमंत्री कोटे से 3000 नयी नौकरियों का एलान हो ही गया है | छः साल बीतते बीतते अपने पांव पर तो खड़ा कर ही देंगे !

(March 11, 2015)

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