लोककथाएं हमेशा
से परंपरा का हिस्सा रही हैं | लोककथाओं के नायक अक्सर, मजाकिया, प्रैक्टिकल जोक
दाग देने वाले, चतुर किस्म के होते थे | बीरबल भी लोककथाओं के हैं, तेनालीराम भी !
ऐसे ही कभी राजा हरी सिंह के राज्य में एक गोनू झा हुआ करते थे बिहार के मिथिलांचल
में | तेरहवी शताब्दी की बात है, उनके कई किस्से प्रचलित हैं |
माना जाता है की
उन्हें “प्रत्युत्पन्नमति” होने का वरदान था | बुरी से बुरी स्थिति को अपने पक्ष
में मोड़ लेते थे | ज्यादातर अपनी चतुराई का इस्तेमाल वो राजा साहब से ईनाम वसूलने
और ईर्ष्यालु दरबारियों की टांग खीचने में करते थे |
राजा साहब इस
किस्से में भी सनकी टाइप थे एक दिन उन्होंने दरबारियों को एक एक भैंस और एक एक
बिल्ली पकड़ा दी | कहा की यॆ दॊनॊ आप अपनॆ घर लॆ जाइयॆ और बिल्ली कॊ खुब खिलाए पिलाए
,वह जितना दुध पी सकॆ पीनॆ दॆ | एक साल बाद जिसकी बिल्ली सबसॆ मोटी होगी उसॆ इनाम
दिया जाएगा |
सभी दरबारी भैस और
बिल्ली लॆकर अपनॆ घर आ गयॆ | बिल्ली कॊ खुब खानॆ
पिलानॆ लगॆ | गॊनु झा भैस कॊ खुब खिलातॆ
लॆकिन भैस जितना दुध दॆती सारा दुध बिल्ली ही पी लॆती | गॊनु झा कॊ यह बात थोड़े ही दिन में बुरी लगने
लगी ! उन्हॊनॆ सॊचा भैस कॊ इतनी मॆहनत सॆ खिलाता हुं लॆकिन सारा दुध बिल्ली ही पी लॆती
है | यदि बिल्ली कॊ दुध नहीं दिया तॊ बिल्ली पतली हॊ
जाएगी | तब राजा मुझॆ दण्ड् दॆगॆ, कुछ ऎसा उपाय करु जिससॆ
सांप भी मर जाय और लाठी भी न टुटॆ |
उन्हॊनॆ अगले ही
दिन एक बर्तन मॆ दुध कॊ खुब ऊबाळा और बिल्ली कॊ बुलाया ,बिल्ली जब कटॊरॆ कॊ मुंह लगाया गॊनु झा नॆ बिल्ली कॊ गर्दन कॊ
गर्म दुध मॆ डुबॊयॆ रखा, बिल्ली का मुंह जला
वो जान बचा कर छूटते ही भाग गई | यॆ सिलासिल तीन चार
दिनॊ तक चला | अब बिल्ली कॊ पता था की
दूध मिलने पर उसका मुंह जलेगा | अब तॊ कटॊरॆ कॊ दॆखकर
ही बिल्ली भाग जाती |
इस तरह एक साल बित गया, राजा नॆ अपनॆ दरवारियॊ
कॊ बुलवाया सबकी बिल्ली मंगवाई गई सभी बिल्लियां मॊटी ताजी थी | लॆकिन गॊनु झा की बिल्ली दुबली पतली थी | राजा नॆ गॊनु झा सॆ पुछा ,गॊनु झा बॊलॆ महराज इसमॆ मॆर कॊई दॊष नही मॆरा भाग्य ही खॊटा
है | मॆरी बिल्ली तॊ दुध
पीती ही नही | राजा साहब ने कहा, आप मुझॆ ठग रहॆ है, भला बिल्ली दूध न पिए ? ऐसा कैसे हो सकता है ?
गॊनु झा बॊलॆ आप जांच
कर हुज़ूर ! फ़ौरन एक कटॊरा दुध लाया गया | दुध कॊ दॆखतॆ ही बिल्ली
भाग गयी |
कई बार लॊगॊ नैं कॊशिस की
लेकिन, किन्तु, परन्तु बिल्ली दुध कॆ कटॊरॆ कॆ पास तक नहीं आयी | फिर एक थाली चावल
लाया गया तॊ बिल्ली नॆ झट सॆ खा लिया |
राजा बॊलॆ इसमॆं जरुर
गॊनु झा की कॊइ चतुराई ही है, लेकिन बिल्ली को दूध पीने से रोक दिया है गोनू झा
ने, इसलियॆ पहला ईनाम उन्ही कॊ दॆता हुँ | गॊनु झा ईनाम की
रकम समेट कर खुशी ख़ुशी अपनॆ घर चलॆ |
अब सिसोदिया साहब
ने पत्रकारों के साथ कैसा सुलूक किया वो तो देखा ही होगा | तीन घंटे जी हाँ पूरे
तीन घंटे बिठा कर फिर भगा दिया, एक बिट नहीं, कोई बाईट नहीं | प्रोग्राम मैनेजर को
को जवाब भी देना होता है बेचारों को ! खाली हाथ चले आये ! क्या सोच कर आये थे
सरदार खुश होगा ? शाबाशी देगा ?
खैर ! बिल्ली का
मुंह अभी एक ही बार जला है, दो चार बार होने दीजिये, बिल्ली दूध पीना छोड़ देगी |
(February 17, 2015)