मैं हूँ क्योंकि हम हैं

कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना नहीं चल सकता | क्या है की कंप्यूटर सिर्फ़ 0 और 1 समझता है वो भी वोल्टेज के बहुत मामूली से उतार चढ़ाव से, अगर कम करंट आया तो 0, सही सही आया तो 1 बस | अब इतना जोड़ घटाव करना साधारण इंसान के बूते के बाहर की बात है | इसलिए इंसान और इस कंप्यूटर नाम के मशीन के बीच ऑपरेटिंग सिस्टम एक जरिया है |
आज जो ऑपरेटिंग सिस्टम हम सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं वो है विंडोज (माइक्रोसॉफ्ट का बनाया हुआ) | इस ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ सबसे बड़ी दिक्कत ये होती है की इसमें वायरस रोज़ ही आ जाते हैं | फिर अलग से एंटीवायरस का ख़र्चा लगता है | एक ऑपरेटिंग सिस्टम UNIX भी होता है, उसमे किसी तरह से वायरस नहीं आ सकते, समस्या ये है की उसे चलाना बड़ा मुश्किल काम है | बरसों के अभ्यास के बाद भी आप ये नहीं कह सकते की मुझे UNIX पूरा आता है |
बड़े कॉर्पोरेट माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ़ धीरे धीरे प्रोग्रामर इकठ्ठा होने लगे और उन्होंने एक LINUX नाम का ऑपरेटिंग सिस्टम बना डाला | जैसे विंडोज के कई अलग अलग version होते हैं, वैसे ही जो LINUX का सबसे प्रचलित अवतार है उसका नाम है UBUNTU | आप कहेंगे कैसा अजीब नाम है ! दरअसल ये अफ्रीका के Xhosa काबिले में प्रचलित एक शब्द है जिसका मतलब बड़ा लम्बा सा है |
हुआ यूँ की एक मानवशास्त्री पहुंचे अफ़्रीकी कबीलों का अध्ययन करने | कबीलों के बीच ही रहते, उनका रहन सहन देखते, प्रकृति के साथ मानव के रिश्ते पर नोट्स भी बनाते जाते | उन्होंने तय कर रखा था की आधुनिक काल के तौर तरीके इन कबिले वालों को सिखाने की कोशिश करेंगे और देखेंगे की इस परिक्षण का परिणाम क्या निकलता है | बच्चों को अगर आज के समय के हिसाब से ढालने की कोशिश की तो जरूर वो सीख पाएंगे, बड़े बुजुर्ग चाहे नए तरीके न भी अपना पायें तो नयी पीढ़ी तो बेहतर होगी !
इसी विश्वास के साथ उन्होंने बच्चों को खेल खेल में प्रतिस्पर्धा सिखाने की सोची | तो एक पेड़ के नीचे उन्होंने कई फल लाकर रखे | वहां से करीब सौ-दो सौ मीटर दूर बच्चों को ले आये, फिर बच्चों को समझाया की उनके दौड़ो कहते ही जो भी दौड़ कर सबसे पहले उस फलों के ढेर तक जा पहुंचेगा उसे सबसे ज्यादा फल मिलेंगे, दुसरे वाले को इस से कम और इसी तरह तीसरे वाले को उस से भी कम | आखरी वाले को कुछ भी नहीं मिलेगा | इतना समझकर वो फलों के ढेर के पास जा खड़े हुए | बच्चे आपस में बात करते रहे, दूर फल के ढेर के पास से वो चिल्लाये “दौड़ो” !
बच्चे एक दो सेकंड तो दौड़े और आगे पीछे हुए फिर धीरे धीरे एक दुसरे का हाथ पकड़ने लगे | पेड़ तक सब एक दुसरे का हाथ पकड़ कर एक साथ पहुँच गए | बच्चों ने फिर आपस में बराबर बराबर फल बांटे और एक साथ गोल घेरा बना कर बातें करते करते फल खाने लगे | मानवशास्त्री महोदय का दिमाग ही हिल गया ! अबे ये हुआ क्या ? आखिर उन्होंने बच्चो से ही पुछा, तुम लोग एक दुसरे का हाथ पकड़ कर साथ क्यों दौड़े ? जवाब मिला, UBUNTU, अगर बाकि सारे लोग दुखी हैं तो हम में से कोई एक कैसे खुश हो सकता है ? सबको बराबर मिलेगा तो सभी बराबर खुश होंगे न !
Xhosa काबिले में UBUNTU का मतलब होता है “मैं हूँ क्योंकि हम हैं” !
ऑपरेटिंग सिस्टम इसी नाम से है, और उसमे वायरस नहीं आते | कभी भी नहीं !
मिडिल क्लास का टैक्स नहीं घटने पर कई वामपंथी विचारधारा वाले भी शिकायत करते नज़र आ रहे हैं | अब चार पांच लाख तक की सालाना कमाई वालों को टैक्स से बाहर कर दिया गया है बन्धु ! आपकी सालाना तनख्वाह छः लाख़ या उस से ज्यादा है इसलिए आपको टैक्स देना पड़ेगा, इस वजह से शिकायत है क्या ? हवाई जहाज के टिकट महंगे होने से दिक्कत है ? चौक का नत्थू हलवाई तो सर्विस टैक्स लेता नहीं, फिर कहाँ जाते हैं आप की 1000 रुपये पर 18 रुपये ज्यादा देने पड़ेंगे इसकी शिकायत हो गई है आपको ? दोबारा एक बार सोचिये न !
कुछ भूल तो नहीं रहे बन्धु ? विचारधारा ? सर्वहारा ?कुछ छोटा सा ? जैसे बांग्लादेश वाले अविजित राय को भूले वहां तो चूं भी नहीं निकली न किसी के मुंह से ..

(March 01, 2015)

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