ये देवता था...

गाँव में किसी की मौत हो गई | मरने वाला महाजन था और सूदखोर भी था | लोगों से मनमाने ब्याज वसूलते वसूलते कईयों की ज़मीन हड़प चुका था | कर्जे की वसूली के लिए वो कईयों के दरवाजे पर खड़ा होकर भद्दी भद्दी गालियाँ चिल्ला चिल्ला कर देता था | इस वजह से भी किसी को पसंद नहीं था | लेकिन अब मर चुका था और गुजरे हुए आदमी के बारे में अच्छी बाते ही बोली जाती हैं | उसके बारे में कोई अच्छी बात थी ही नहीं कोई कहता क्या ?
गाँव में बड़ी समस्या हो गई, अब किसी न किसी को तो कुछ बोलना ही था | तो मुखिया नेकहा, ऐसा करते हैं मुल्ला नसीरुद्दीन को खड़ा कर देते हैं बोलने | अगर कुछ अच्छा बोल गया तो अच्छी बात हैं, कुछ गड़बड़ की तो सब जानते हैं की वो बेवक़ूफ़ है | कह देंगे की ये तो मूरख है, हमने सभा में बोलने का मौका दिया और ये कुछ भी बोल गया !
सब इस विचार से सहमत हो गए | मुल्ला नसीरुद्दीन को पकड़ कर बोलने के लिए खड़ा कर दिया गया | उन्होंने बोलना शुरू किया, “ये जो मारा है ये परले दर्ज़े का कमीना था, इसकी जबां जहर उगलती थी, दिल में खोट था और इसकी गन्दी निगाहें हर पल अपना अगला शिकार तलाशती थी !” सभा में हलचल मच गई ! लोग मुल्ला नसीरुद्दीन को पकड़ के बिठाने को हुए, लेकिन मुल्ला ने बोलना जारी रखा, आगे कहा, “...लेकिन अभी इसके पांच भाई और जिन्दा हैं ! अगर उनकी तुलना में देखा जाए तो ये देवता था !”
अब भाई जो एक न्यूज़ एजेंसी से निकल गया उसे गुजरा हुआ ही माना जाना चाहिए | क्या हुआ जो उनका अपत्तिजनक MMS आया था तो ? अभी उनके कई भाई और हैं, उनकी तुलना में तो ये देवता था !

(March 09, 2015)

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