एक बार एक जंगल में एक शेर था | जंगल में तो एक ही शेर होता है, तो ये शेर भी अपनी शेरनी और सिंह शावक के साथ रहता था | अकेले में किस बराबर वाले से दोस्ती करे बेचारा ? बड़ी कठिन समस्या थी | सारे शाकाहारी पशु तो उसे देखते ही भाग खड़े होते थे |
ऐसे में पूरे जंगल में एक सियार था जो उसके आस पास फटकने की जुर्रत करता था | क्या था की सियार खुद तो शिकार कर नहीं पाता था इसलिए शेर के बचे खुचे में मुंह मारने वहीँ कहीं बैठा रहता था | जब ऐसे ही कुछ दिन बीते तो कभी कभी सियार की शेर से बात चीत भी होने लगी | कोई और था नहीं शेर के पास तो शेर भी सियार से ही खुल के बातें करता | दोस्ती टाइप हो गई दोनों में |
अक्सर ही सियार शेर की मांद पर भी आने लगा, जैसे जैसे परिचय बढ़ा वो गुफ़ा के अन्दर भी आने जाने लगा | अब शेर के घर रोज़ आने जाने वाले का जंगल में भी कुछ रुतबा बढ़ गया | जानवर सियार को शेर का भेदिया समझते थे और उसके आने पर कन्नी काट लेते थे | लेकिन सियार को लगता था की जानवर उसके डर से रास्ता खाली कर देते हैं |
धीरे धीरे समय बीता और सियार जरा घमंडी हो चला | उसने सोचा वो खुद भी तो कर सकता है शिकार | तो शिकार का तरीका वो शेर को देख देख के चुपके चुपके सीखने लगा | शेर सुबह गुफ़ा से निकलने से पहले अंगड़ाई लेता था | फिर वो शेरनी से पूछता, क्या मेरी पूँछ तनी हुई है ? शेरनी देखती की हां सचमुच पूँछ तन गई है, वो कहती हां तनी हुई है | फिर शेर पूछता, क्या मेरे आयल के बाल खड़े हो गए हैं ? शेरनी देखती की हां सचमुच आयल के बाल खड़े है, वो कहती हां सारे बाल खड़े है | शेर पूछता क्या मेरी आँखें लाल हैं ? शेरनी देखती की हां सचमुच आँखे लाल हो गई है, वो कहती हां लाल है | उसके बाद शेर जोर से दहाड़ता और पूछता क्या मेरी दहाड़ से सारा जंगल हिला ? शेरनी देखती की हां सचमुच जंगल हिल गया है, वो कहती हां ऐसा हुआ है | शेर झपट कर जंगल में निकलता और थोड़ी ही देर में शिकार कर के वापिस आ जाता |
सियार ने एक दो दिन देखा फिर सोचा वो सीख गया शिकार करना | अपनी कोटर में वापिस आ के शाम में सो गया | सुबह उठा अंगड़ाई ली और सियारनी से कहा देख मेरी पूँछ तनी हुई है ? सियारनी ने कहा, हां कुछ कुछ तनी सी लग तो रही है | सियार ने गर्दन झटकी और कहा देख मेरी गर्दन के सारे बाल खड़े हो गए ? सियारनी ने पुछा ये हुआ क्या है तुम्हें सुबह सुबह ? सियार ने कहा चुप कर ! देखती नहीं मैं शिकार पे निकल रहा हूँ ! बता गर्दन के बाल खड़े हुए या नहीं ? सियारनी ने मुस्कुराते हुए कहा हां हो गए | मेरी आँखें लाल हुई ? सियार ने पुछा | सियारनी ने पंजे से मुंह ढकते हुए कहा, जी हो गई | सियार ने अब जोर से हुआ हुआ की और सियारनी से पुछा, जंगल हिला मेरी हुंकार से ? अब तो सियारनी को जोर से हंसी आ गयी ! लोट पोट होते हुए बोली, अजी छोड़ो भी आप, एक पत्ता भी नहीं हिला ! गुस्से में सियार ने सियारनी को दी एक लात, शिकार से लौट कर तेरी मरम्मत करता हूँ कहकर अपनी कोटर से निकला |
अब तो सियार के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया था, शिकार करे तो किसका ? आखिर सियार ने सोचा, कमबख्त शेर का ही शिकार किया जाये | उस से जंगल में मेरी साख भी बन जाएगी | तो पहुंचा वो शेर की मांद पर और बाहर से चिल्लाया, अबे शेर के बच्चे निकल बाहर ! सिंह शावक ने सोचा सियार चाचा शायद कोई ख़रगोश पकड़ लाये, खेलने बुला रहे होंगे | वो कूद कर बाहर आया, सियार ने उस से कहा, अबे अपने बाप को बुला ! आज मैं पहली बार शिकार पर निकला हूँ, बोहनी शेर से ही करूँगा ! सिंह शावक ने समझाया, अरे रहने दो सियार चाचा क्यूँ दिल्लगी करते हो ? बेकार पिताजी ने कही सुन लिया तो लेने के देने पड़ जायेंगे ! सियार नहीं माना, इधर उधर चक्कर काटता, उल ज़लूल बकता, ज़मीन कुरेदता रहा |
यूँ तो शेर का बच्चा भी सियार को निपटा देता, लेकिन उसने सोचा पिता श्री के मित्र हैं, उन्ही को निपटने दो | अन्दर गया और शेर से कहा देख लो आप ही | शेर बाहर आया सियार की बातें सुनी तो सोचा शायद कहीं से सुबह सुबह अफ़ीम चाट आया है | जाने दो होश आने पर देखेंगे | लेकिन सियार मानने को राज़ी ही नहीं ! बार बार लड़ने को कहता रहा | आखिर शेर से नहीं रहा गया, अबे चल ! कहते हुए उसने एक पंजा सियार पर धर दिया | अब सियार का क्या हुआ होगा ये तो बताने की जरूरत नहीं ही है |
खैर, शपथ ग्रहण में काली दाढ़ी वाला हाथ पकड़ के आगे ले आया | फिर सफ़ेद दाढ़ी वाला पहुँच गया समाजवादी शादी में सबसे हाथ भी मिला आया | इतने पे लोगों को ग़लतफ़हमी हो गई ! मतलब हद है ! शेर से हाथ मिला लेने से सियार शेर नहीं बन जाता भाई | भूमि अधिग्रहण पर उत्तर प्रदेश बिहार फ़तह करने निकले थे ? दिल्ली टाइप ख़रगोश से ही सियार को तसल्ली करनी चाहिए |
पड़ गया न सांप्रदायिक झपट्टा सेक्युलर, समाजवादी पंजे पर !