नैनागढ़ की लड़ाई ( बरात आगमन वर्णनोनाम प्रथम स्तरंग)

सवैया
दीनसहायक नाम तुम्हार सुना बहु ग्रंथन में महाराज |
है शबरी गजगीध अजामिल ते अजहुं जिहिकोयशछाजा ||
जो करणी सुमिरों इनकी तबहीं मन धैर्य्य लहै रघुराज |
दिन पुकारकरै ललिते प्रभु बेगि द्रवों हे गरीब नेवाजा ||
सुमिरन ||
गया न किन्ही जिन कलयुग माँ
काशिम घोडा दान नहिं दीन ||
जनमत बैरी जिन मारा ना
नाहक जन्म जगत में लीन १
पूजा कीन्ही नहिं शम्भू की
अक्षत चन्दन फूल चढ़ाय ||
फिरि गलमाँदरी जिन बजी ना
मुख ना बम्ब बम्ब गा छाय २
भसमरमायो नहिं देहि माँ
कबहूँन लीन सुमिरनी हाथ ||
सोचन लायक ते आरय हैं
जिन नहिं कबों नवायोमाथ ३
को अस देवता रहै शम्भुसम
जिनको पूज्यो राम उदार ||
वेद उपनिषद के ज्ञाता रहैं
जिनबल भयो रावणछार ४
छुटी सुमिरन गै देवन कै
शाका सुनो शुरमनक्यार ||
ब्याह बखानों मैं आल्हा का
होई तहाँ भयानक मार ५
अथ कथाप्रसंग
नैनागढ़ का जो महाराजा
सजा सबै भांति कर्त्तार ||
राजा इन्दर का बरदानी
औ नैपाली नाम उदार १
तिन घर कन्या इक पैदा भे
सबबिधि रूप शीलगुणखान ||
पढ़ीकै विद्या सब जादू की
कछुदिनबाद भई फिरिज्वान २
संगसहेलिन के खेलति भय
सुनवाँ कही तसुका नाम ||
खेल लरिकईं को जाहिर है
लरिका ख्यलें चारिहूयाम ३
खेलत खेलत फुलबगिया गईं
सब मिलि करैं फुलनकी मार ||
कटहर बड़हर त्याही बगिया में
कहुं कहुं फूल रही कचनार ४
उठे सुगंध कहू चन्दन की
कतहूँ कतलिन खड़ी कतार ||
गुम्मज सोहैं मोमशिरिन के
कहूँ कहुं फुलीं चमेलीडार ५
बेला फूले अलबेला कहुं
खिन्नन लाता गईं बहुछाय ||
हर्र वहेरा सांखो बिरवा
सीधे चले ऊपर को जायें ६
बरगद छैलें हैं नीचे को
फैले भूमि रहे नियराय ||
जैसे सम्पति सज्जन पावैं
नीचे शीश झुकावट जाएँ ७
शीशम जानो तुम नीचनको
आधे सरग फरहरा खाएं ||
चलै कुल्हाड़ा जब नीचेते
गिरिके टूक टूक ह्वैजाएँ ८
को गति बरणे तहाँ अधमनकै
सो हैं करिल रूपते भाय ||
टाल तमालन कै गिनतिना
कदमन गई सघनता छाय ९
फुली नेवारी अब अगस्त्य हैं
आमनडार क्केलिया बोल ||
सोहें अशोकन के बिरवा भल
तीनो चाहं बयारी डोल १०
गुलर जामुन पाकर पीपर
कोनन खड़े वृक्ष सरदार ||
तार अपारन के बिरवा बहु
कहुं कहुं खड़े वृक्ष कह्वार ११
टेसू फूलें कहुं सोहत हैं
जैसे सोहें लडैता ज्वान ||
रूप गुलाबन को देखंत खन
फुलनछांडीदीन अभिमान १२
कौन कनेरण को वर्णन कर
चांदनि चाँद सरिस गै छाय ||
फूल दुपहरी के भल सोहैं
मोहैं मुनिन मनै अधिकाय १३
गेंदन केरे बहु बिरवा हैं
अर्जुन बृक्ष परैं दिखराय ||
मिला लाग्यो नौरंगिन का
हेला निम्बुन का दर्शाय १४
ठेला भरि भरि अमरूतन का
माली राजभवन को जाय ||
केवांडा केरी उठें सुगंधे
कहुंकहुं नागबेलिगे छाय १५
ताही बगिया सुनवाँ खेलै
मेलै गले सखिन के हाथ ||
सखियाँ बोली तहाँ सुनवान्ते
तुम नित ख्यलोहमारेसाथ १६
पैर महावर पै तुम्हरे ना
टिकुली नहीं बिराजै भाल ||
द्रव्य तुम्हारे का घर नाहीं
जो नहिं ब्याह करै नरपाल १७
इतना कहिकै सब आलिनने
औ करताली दीन बजाय ||
समय दुपहरी को जान्यो जब
तब फिरि खेलबन्द ह्वैजाय १८
कीरति गावैं सब आल्हा की
माड़ो लिहेनि बापका दाएँ ||
धन्य बानफ़र उदयसिंह हैं
आल्हा केर लहुरवा भाय १९
ऐसी बातैं सखियाँ करतै
अपने भवन पहुँचीं आय ||
ताही क्षणमें सुनवाँ मन में
अपने ठीक लीन ठहराय २०
ब्याही जैबे आल्हा संग में
की मरिजाब जहर को खाय ||
छाय उदासी गै चिहरा में
पूँछै बार बार तब माय २१
कौन रोग है त्वरि देही माँ
बेटी हाल देउ बतलाय ||
पीली ह्वैगै सब देही है
औतनकाँपिकाँपिरहिजाय २२
को हितकारी है मातासम
नाता बड़ा जगत केहिभाय ||
अब तो बाबा कलियुग आये
माता सहैं लात के धाय २३
सुनिकै बातें ये माता की
सुनवाँ चरणन शीश नवाय ||
जो कछु भाषारहै सखियनने
सुनवाँ मातै गई सुनाय २४
सुनीकै बातैं सब कन्या की
माता रही समय को देखि ||
यकदिन ऐसा आनपहूंचा
राजा रहा कन्यका पेखि २५
रानी बोली तब राजाते
हमरे वचन करो परमान ||
ब्याहन लायक यह कन्या भए
सोतुमजानो नृपतिसुजान २६
सुनिकै बातैं ये रानी की
बिजिया बेटा लीन बुलाय ||
नाई बारी को बुलवायो
तिनते कह्योहालसुझाय २७
जयो मोहोबे ना टीका लै
सब कहूँ जाउ तुरतही धाय ||
नाई बारी तुरतै चलिभे
पहुंचे नगर नगर में जाय २८
काहू टीका को लिन्ह्यो ना
नैनागढ़े पहूचे आय ||
खबरि सुनाई सब राजा को
नेगिनचरणशीशनवाय २९
जालिम राजा नैनागढ़ का
राजन यही विचार जीय ||
मारे डरके छाती धड़कै
कैसेहोयें तहांपर पीय ३०
थोरी थोरी फौजें लैकै
नैनागढ़ै पहूंचे आय ||
नजरी दीन्ह्यो नैपाली को
राजाचरण शीशनवाय ३१
सरबरि तुम्हरि का नाहीं हैं
टीका लैयं कहौ कास भाय ||
कुमुक तुम्हारी को आयन है
राजन सत्यदीन बतलाय ३२
त्यही समैया त्यही औसरमाँ
औ सुनवाँ को सुनो हवाल ||
हीरामणि सुवनाको लैके
सुनवाँ भई रोवासिनिबाल ३३
चुम्यौ चाट्यो त्यहि सुवनाको
औफिरिकह्योवचन यह गाय ||
मेवा खायो भल पिंजरन में
अब गाढ़े में होउ सहाय ३४
लैके पाती जाउ मोहोवे
देवो उदयसिंह को जाय ||
लिखी हक़ीकत सब आल्हाको
सुनवाँ बार बार समुझाय ३५
नामी ठाकुर तुम मोहबे में
हमरो ब्याह करो अब आय ||
नहिं मरि जायो जहर खायकै
दूनो भाइ बानफ़रराय ३६
लिखिकै पाती गल सुवनाके
सुनवाँ तुरत दीन लटकाय ||
मूठी दीन्ह्यो फिरि कोठे ते
सुवना चला मोहोबे जाय ३७
चन्दन बगिया सुवना पहुँच्यो
तहं पर रहै उदयसिंहराय ||
चन्दन ऊपर सुवना बैठो
परिगा दृष्टि तुरतही आय ३८
भल चुचकास्यो उदयसिंह ने
आपन नाम दीन बतलाय ||
सुवना बैठ्यो तब हाथेपर
पाति छोरी लीन हर्षाय ३९
बांचिकै पाती तब उदन ने
औ सय्यद को दीन सुनाय ||
सय्यद आल्हासों बतलायो
मलखे देबै दीन बताय ४०
लैकै पति औ सुवना को
गे परिमाल कचहरी धाय ||
कही हकीकति सब राजा सों
पाती दीन उदयसिंहराय ४१
पढ़ीकै पाती को परिमालिक
मनमाँ गए सनाकाखाय ||
होश उड़ान्यो परिमालिक को
मुँहकाबिरागयो कुम्हिलाय ४२
बोली ना आवा परिमालिक सों
औ द्वाढालों लार सुखाय ||
थर थर थर थर देहि काँपी
शिरसों मुकुट गिरा भहराय ४३
रोम रोम सब ठाढ़े ह्वैगे
नैनन बही आँसू की धार ||
धीरजधरिकै परिमालिक फिरि
औ मलके tan रहे निहारि ४४
मलखे बोले तब राजा ते
साँचे बचन सुनो नरपाल ||
टीका पठयो है बेटी ने
सोंहिंलौटीसकैक्यहुकाल ४५
सुनिकै बातें मालखाने की
बोले तुरत रजापरिमाल ||
ब्याधि नशायो गढ़माड़ो को
दूसरि ब्याधिभयोफिरिहाल ४६
टीका फेरो नयनागढ़ को
मलखे मानो कही हमार ||
जालिम राजा नयपाली है
ज्यहिघर अमरढोल सरदार ४७
कौन बियाहन त्यहि घर जैहै
ऐहै लौटि कौन बलवान ||
टीका फेरो सब राजन ने
मानो कही वीर मलखान ४८
सवैया
शान ठाढ़ी मलखान के ऊपर आँ नहीं कछुहू नृप राखी |
मोहिं पियार न प्राण भुवार कहौ मैं सत्य सदाशिव साखी ||
कीरतिही प्रिय विरनको हम शान कि आन सदा मनमाखी |
आनरहैनहिं शान कि जो मरिजान भलो ललिते हम भाखी ||
इतना कहिकै मालखाने ने
डंका तुरत दीन बजवाय ||
लिखिकै उत्तर उदयसिंह ने
सुवना गरे दीन लटकाय ५०
उड़ीकै सुवना फिरि मोहोबे ते
सुनवाँ पास पहूंचा आय ||
रानी मल्हना के महलन में
राजा तुरत पहूंचे जाय ५१
हाल बतायो सब मल्हना को
सुनतै गई सनाका खाय ||
मलखे देवा को बुलवायो
सुनतै गये महल में आय ५२
मल्हना बोली तब मलखे ती
बेटा हाल देउ बतलाय ||
कहे डंका तुम्हरे बाजे
कहाँ चढ़ीजाउ बानफ़रराय ५३
हाथ जोरिकैमलखे बोले
मल्हना चरणन शीश नवाय ||
पाती आई नैनागढ़ की
आल्हा तहाँ बियाहन जाएँ ५४
सुनिकै बातैं मालखाने की
मल्हनै देवै कहा सुनाय ||
शकुन तुम्हारे सो मलखाने
माड़ो लीन बाप का दाएँ ५५
कैसी गुजरी नैनागढ़ में
सो सब हाल देव बतलाय ||
सुनिकै बातैं ये मल्हना की
देवा पोथी लीन मंगाय ५६
लैकै पोथी ज्योतिष वाली
औ सब हाल दीन बतलाय ||
जीति तुम्हारी यहाँ हैहै
साँची बात कहैं हम माय ५७
इतना कहिकै दूनों चलि भे
महलन भये मंगलाचार ||
बांदी आँगन लीपन लागी
पंडित साइति रहे बिचार ५८
एक कुमारी तेल चढ़ावै
गावनलगीं सखी त्यहिकाल ||
माय मंतरा भे पाछे सों
नेगिननेग दीन परिमाल ५९
लैकै महाउर नाइनि आई
नहखुर होनलाग त्यहिबार ||
नाइनि मांग्यो तहं पुरवाको
दीन्ह्यो मल्हना परम उदार ६०
उबटन करिकै तन केसरसों
निर्मलजलसों फिरिअन्ह्वाय ||
कंकण बांधागा आल्हा के
दूलह बने बानफ़रराय ६१
सजी पालकी तहं ठाढ़ीथी
तापर बैठी शम्भू को ध्याय ||
कुंवा बियाहन आल्हा पहुंचे
मल्हना पैर दीन लटकाय ६२
पहिली भांवरि के फिरतैखन
आल्हा गह चरणको धाय ||
बाग़ लगावों तेरे नाम की
माता लेवो चरण उठाय ६३
ऐसो कहिकै सातों भाँवरि
घूमा तुरत बनाफ़रराय ||
मल्हना बोली फिरि आल्हा सों
सेयों तुमको दूध पियाय ६४
तासों द्यावलि सों अधिकी मैं
तासों पैर दीन लटकाय ||
पंजा फेरयो फिरि पीठी माँ
तुम्हरो बार न बांको जाय ६५
पांय लागीकै फिरि द्यावलिके
पालकी चढ़े बनाफ़रराय ||
हुकुम लगायो बधउदन ने
डंका बजन लाग घहराय ६६
घोड़ करिलिया आल्हा वाला
कोतल चला पालकी साथ ||
मलखे पपीहापर बैठत भे
नायकै रामचंद्र को माथ ६७
घोडा मनोहरा की पीठी माँ
देबा तुरत भयो असवार ||
सय्यद सिरगा पर बैठत भे
नाहर बनरस के सरदार ६८
अली अलामत औ दरियाखां
बेटा जानबेग सुलतान ||
तेग बहादुर अली बहादुर
बैठे घोड़ आपने ज्वान ६९
मीराताल्ह्न के लरिका ये
नाहर समरधनी तलवार ||
मन्नागूजर मोहबे वालो
सोऊ बेगि भयो असवार ७०
सातलाख लग फौजें सजिकै
नैनागढ़ को भई तयार ||
डंका बाजें अह्तंका के
उदन बेंदुलपर असवार ७१
सजे बाराती सब मोहबे के
जल्दी कूच दीन करवाय ||
सातरोज़ की मैजली करिकै
फौजें अटी धुरा पर आय ७२
आठ कोस नैनागढ़ रहिगा
तहंपर डेरा दीन डराय ||
तम्बू गडिगा तहाँ आल्हा का
बैठे सबै शूरमा आय ७३
ऊँचे ऊँचे तम्बू गड़ीगे
नीचे लागीं खूब बाजार ||
कम्मर छोरे रजपूतन ने
हाथिन हौदा धरे उतार ७४
तंग बछेड़न की छोरी गईं
क्षत्रिन धारा ढाल तलवार ||
बनी रसोई रजपूतन की
सबहिनजेंयलीन ज्यँवनार ७५
गा हरकारा तब तहँनाते
जहाँना भरीलाग दरबार ||
बैठक बैठे सब क्षत्री हैं
एकते एक शूर सरदार ७६
गम् गम् गम् गम् तबला गमकें
किन् किन् परी मंजीरन मार ||
को गतिबरनै सारंगी कै
होवै नाच पतुरियन क्यार ७७
खये अफिमनके गोला कोउ
पलकैं मूंदे और रहिजाएँ ||
कोऊ जमाये हैं भांगन को
मनमाँ रहे रामयश गाय ७८
उड़े तमाखू बुटवल वाली
धूंवना रहा तहांपर छाय ||
हाथ जोरि औ बिनती करिकै
धावन बोल्यो शीशनवाय ७९
अई बरातें क्यहू राजाकी
घूरे परीं आजही आय ||
आठकोस केहैं दुरीपर
सांची खबरि दीन बतलाय ८०
सुनिकै बातैं नयपाली ने
तीनो लड़िका लये बुलाय ||
जोगा भोगा औ बिजियाते
राजा बोल्यो बचन सुनाय ८१
जावो जल्दी तुम घूरेपर
हमको खबरि सुनावो आय ||
सुनिकै बातै  तीनो चलिभे
घूरे तुरत पहूंचे जाय ८२
ऊँचे टिकुरी तीनो चढीकै
दूरिते द्यखैं तमाशा भाय ||
देखिकै फौजें मालखाने की
तीनों गये तहाँ सन्नाय ८३
तीनों लौटे त्यहि टिकुरिते
अपने महल पहूंचे आय ||
भोजन केरी फिरि बिरियामाँ
राजै खबरि दीन बतलाय ८४
लगी कचहरी ह्याँ आल्हाकी
भारी लाग तहाँ दरबार ||
बैठक बैठे सब क्षत्री हैं
एकते एक शूर सरदार ८५
मीराताल्हन बनरसवाले
आलि खानदान के ज्वान ||
बड़े पियारे ते क्षत्रिन के
अपने धर्म कर्म अनुमान ८६
सच्चे साथी रहें चारों के
यारों मानों कही हमार ||
ऐसे होते जो सय्यद ना
कैसे बने राहत सरदार ८७
अली अलामत औ दरियाखां
बेटा जानबेग सुलतान ||
औरो लड़िका रहैं सय्यदके
एकते एक रूप गुणखान ८८
मन्नागुजर मोहबे वाला
बैठा बड़ा सजीला ज्वान ||
रुपनाबारी ते त्यहि समया
बोले तहाँ बीर मलखान ८९
ऐपनवारी बारी लैकै
राजैद्वार पहूँचो जाय ||
सुनिकै बाते मालखाने की
रुपना बोला शीशनवाय ९०
औरो नेगी मोहबे वाले
आये साथ बनाफर राय ||
ऐपनवारी बारी लैकै
द्वारे मूड कटावै जाय ९१
सुनीकै बातें ये रुपना की
बोले तुरत उदयसिंहराय ||
तुमको नेगी हम मानै न
जानै सदा आपनो भाय ९२
ददा बियाहन को रहि हैं ना
बतियाँ कहिबे को रहिजाएँ ||
यश नहींजावै नर मरिजावै
परहित देवै मूडकटाय ९३
स्वारथ देही तब नरकेही
नेही मरे न पावै चाम ||
सन्मुख जूझे समरभूमि में
जावै तुरत हरी के धाम ९४
बड़े प्रतापी जग में जाहिर
मनियांदेव मोहोबे केर ||
तिनके सेवक तेई रक्षक
रुपन काह लगावो देर ९५
रूपन बोला तब मलखे ते
दादा मानो कही हमार ||
घोड़ करिलिया आल्हा वाला
अपने हाथ देउ तलवार ९६
सुनिकै बातै ये रुपना की
मलखे घोड़ दीन सजवाय ||
ढाल खड्ग रुपना को दैकै
बैठे तुरत बनाफरराय ९७
बैठिकै रुपना फिरी घोड़े पर
ऐपनवारी लीन उठाय ||
चारिघरी को अरसा गुजरो
नैनागढ़े पहूचो जाय ९८
देखिकै बारी दरवानी ने
भारी हांक दीन ललकार ||
कहाँ ते आयो औ कहँ जैहौ
बोलो घोड़े के असवार ९९
सुनिकै बातैं द्वारपाल की
रूपन बोला बचन उदार ||
आल्हा ब्याहन को हम आये
नामी मोहबे के सरदार १००
खबरि सुनावो नैपाली को
फिरि तुम हमैं सुनावो आय ||
ऐपनवारी बारी लायो
ताको नेग देव पाठवाय १०१
सुनिकै बोलो द्वारपाल फिरि
तुम्हरो नेग काह है भाय ||
सोऊ सुनावों महराजा को
लादे लिहे घोड़ पर जाय १०२
सुनीकै बातें द्वारपाल की
रूपन बोला बचन उदार ||
चारिघरीभर चलै सिरोही
द्वारे बहै रक्त की धार १०३
नेग हमारो यहू प्यारो है
देवो पठे स्वई सरदार ||
जाही पियारो तन होवै न
आवै स्वई शूर अब द्वार १०४
सुनिकै बातें ये बारी की
आरी द्वारपाल ह्वै जाय ||
मनमें सोचै मनै बिचारै
मनमें बार बार पछिताय १०५
कैसो बारी यहु आयो है
नाहर घोड़ेका असवार ||
जालिम राजा नैपाली है
तासों कीं चाहै तलवार १०६
यहै सोचिकै द्वारपाल ने
औ रुपन ते कहा सुनाय ||
गरमी तुम्हारी जो उतरी हो
बोलो ठीक ठीक तुम भाय १०७
सुनिकै बातें दरवानी की
रूपन गरू दीन ललकार ||
नगर मोहोबा जगमें जाहिर
नामी मोहबे के सरदार १०८
तिनको नेगी मैं द्वारेपर
लीन्हे खड़ा ढाल तलवार ||
जौन सूरमा हो नैनागढ़
आवै देय नेग सो द्वार १०९
इतनी सुनिकै दरवानी ने
राजै खबरि सुनाई जाय ||
ऐपनवारी बारी लावा
भारी बात कहै सो गाय ११०
चारिघरीभर चलै सिरोही
द्वारे बहै रक्त की धार ||
जौन शूरमाहो राजाघर
आवै देय नेग सो द्वार १११
इतना सुनतै महराजाके
नैना अग्नि बाण ह्वै जाएँ ||
पूरण राजा पटनावाला
बोला राजै बचन सुनाय ११२
हम चलिजावैं अब द्वारेपर
बारी नेग देयं चुकवाय ||
इतना कहिकै चलि ठाढो भो
साथै औरो चले रिसाय ११३
सवैया ||
द्वार चले तलवार लिए रत मारहि मार कुमारन पेखा |
लाल गुपाल गाहे करबाल ख्यलें जसफाग भयऊ तस भेखा ||
मार अपार जुझार किये औ गिरे रणखेत रहे नहिं शेखा |
बारीकरै कब रारी नृपे ललिते मलखान कि है यह लेखा ११४
पूरन राजा पटना वाला
लीन्हे नांगि हाथ तलवार ||
सो धरि धमका त्यहि रुपनके
रूपन लीन ढालपर वार ११५
सांगी उठाई फिरि रूपन ने
राजै बार बार ललकार ||
लटुवा लाग्यो पूरन शिर में
औ बहिचली रक्तकी धार ११६
अगल बगल के फिरि मारतभा
दायें बायें दीन हटाय ||
ऍड़ा मसके फिरि मारत भो
फाटक तुरत पार ह्वैजाय ११७
गाली गाली में फिरि मारत भो
औ बहिचली रक्तकी धार ||
घरी चारके फिरि अरसा में
लश्कर आय गयो असवार ११८
लाले रंग सों भीजे दिख्यो
फागुन टेसू के अनुहार ||
पूँछी हकीकति तब मलखेने
नाहर मोहबे के सरदार ११९
कैसी गुजरी नैनागढ़ में
रूपन हाल देउ बतलाय ||
सुनिकै बातें मलखाने की
रूपन यथातथ्य गा गाय १२०
हल्ला ह्वैगा नैनागढ़माँ
जहाँ तहाँ कहाँ लागि सबकोय ||
ऐसे बहादुर जहांके परजा
तहंके नृपतिकहौ कास होयँ १२१
देखी तमाशा यहु बारी का
राजा बार बार पछिताय ||
बड़ी हीनता हमरी ह्वैगै
बारी जियतनिकरिगाहाय १२२
जोगा भोगा दोऊ लरिका
बोले हाथ जोरि शिरनाय ||
हुकुम जो पावैं महराजा का
सबकी कटा देयंकरवाय १२३
जितनी रांडें चढ़ी आई हैं
सो बिनघाव एक ना जायें ||
खेदिकै मारें हम मोहबे लग
टेटूवा टायर लयं चिनाय १२४
सुनीकै बातैं ये लरिकन की
राजै हुकुम दीन फ़रमाय ||
तुरत नगड़ची को बुलवायो
तासोंबोल्योहुकुमसुनाय १२५
बजै नगाड़ा नैनागढ़ में
सबियाँ फौज़ होय तय्यार ||
भोर भुर्हरे पहफाटत खन
मारों मुह्बे के सरदार १२६
इतना कहिकै दूनों चलिभे
अपने महल पहूंचे जाय ||
खेत छुटीगा दिननायक सों
झन्डागडानिशाको आय १२७
तारागण सब चमकन लागे
संतान धूनी दीन परचाय ||
परे आलसी निजनिज खटिया
घों घों कंठ रहे घर्राय १२८
माथ नवाबों पितु अपने को
जो नित मिरे करें सहाय ||
करों तरंग यहाँ सों पूरण
पूरण ब्रह्म राम को ध्याय १२९
आए फौजें दूनों सजिहैं
मची हैं घोर शोर घमसान ||
जोगा भोगा के मुर्चापर
लड़ी हैं खूब वीरमलखान १३०
बरातआगमनवर्णनोनामप्रथमस्तरंग